कानपुर में ई-रिक्शा की अराजकता पर लगाम: ट्रैफिक जाम से जल्द मिलेगी राहत
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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर शहर लंबे समय से ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। इसमें ई-रिक्शाओं की अनियंत्रित संख्या और मनमाने संचालन की बड़ी भूमिका है। शहर में करीब 50 हजार ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो पहले 40 अलग-अलग रूटों पर चलते थे। इससे मुख्य चौराहों पर जाम की स्थिति पैदा हो जाती थी, जहां ई-रिक्शा बीच सड़क पर रुककर सवारियां भरते या उतारते नजर आते थे।
हाल ही में यातायात भवन मीरपुर में डीसीपी ट्रैफिक रवींद्र कुमार की अध्यक्षता में शहर के विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। व्यापारियों ने एक स्वर में सुझाव दिया कि ई-रिक्शाओं को 40 की बजाय मात्र चार या पांच लंबे रूटों पर ही संचालित किया जाए। साथ ही, प्रत्येक रूट पर ई-रिक्शाओं की अधिकतम संख्या 15 हजार निर्धारित करने की मांग की गई। इससे सभी ई-रिक्शा चालकों को लाभ मिलेगा और रूट लंबे होने से उनकी कमाई भी प्रभावित नहीं होगी।
बैठक में भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने घंटाघर चौराहे पर बंद रास्तों को खोलने और शहर के अन्य चौराहों की समीक्षा की मांग उठाई। फीटा के उमंग अग्रवाल ने रूट के आधार पर अलग-अलग नंबरिंग की सिफारिश की, ताकि ई-रिक्शा दूसरे रूट पर न जा सकें। वहीं, माल ढोने वाले और ओला-उबर जैसे ऐप आधारित ई-रिक्शाओं को इस व्यवस्था से अलग रखने का सुझाव भी आया।
डीसीपी ट्रैफिक ने बताया कि नियम उल्लंघन पर पहले ही 1500 ई-रिक्शाओं का चालान किया जा चुका है। अब नई व्यवस्था से शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार आएगा। इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर बुधवार को पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक में लगेगी।
यह कदम न केवल ट्रैफिक जाम से राहत देगा, बल्कि ई-रिक्शा चालकों के लिए भी व्यवस्थित और न्यायपूर्ण ढांचा प्रदान करेगा। शहरवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही कानपुर की सड़कें सुगम और सुरक्षित हो जाएंगी।






