चयन वेतनमान प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 39 बीएसए और 188 बीईओ रडार पर
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स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लापरवाही, 21 दिसंबर तक अंतिम मौका; इसके बाद सख्त ऐक्शन तय
संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों के चयन वेतनमान से जुड़े प्रकरण में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। इस मामले में 188 खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और 39 बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) सीधे तौर पर सरकार के रडार पर आ गए हैं। स्कूल शिक्षा महानिदेशक की चेतावनी के बावजूद कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के केवल कुछ ही जिलों—जैसे हमीरपुर, कानपुर नगर, कौशांबी, मिर्जापुर, शामली और सुल्तानपुर—में ही सहायक अध्यापकों के चयन वेतनमान से संबंधित स्वीकृत आदेश जारी हो सके हैं। इन जिलों के भी मात्र 601 विकास खंडों में ही प्रक्रिया को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया गया है। शेष विकास खंडों में या तो कार्य शुरू ही नहीं हुआ है या फिर नाममात्र की औपचारिकता तक सीमित रह गया है।
स्कूल शिक्षा महानिदेशालय द्वारा सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि चयन वेतनमान मॉड्यूल पर प्राथमिकता के आधार पर 19 दिसंबर तक पूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके बावजूद, महानिदेशालय की ओर से जारी पीडीएफ रिपोर्ट के अनुसार 19 दिसंबर तक प्रदेश के 175 विकास खंडों में इस दिशा में कोई कार्य प्रारंभ नहीं किया गया।
रिपोर्ट में महोबा जिले की स्थिति को सबसे अधिक चिंताजनक बताया गया है, जहां सभी विकास खंडों में चयन वेतनमान से संबंधित प्रगति पूरी तरह शून्य पाई गई है। यह स्थिति विभागीय आदेशों की खुलेआम अनदेखी की ओर इशारा करती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल शिक्षा महानिदेशक ने एक बार फिर अंतिम अवसर देते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 21 दिसंबर तक चयन वेतनमान मॉड्यूल पर कार्यवाही हर हाल में पूरी की जाए। समय सीमा के बाद यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित बीईओ और बीएसए के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अब विभागीय हलकों में यह माना जा रहा है कि यदि तय समयसीमा तक सुधार नहीं हुआ, तो इस प्रकरण में बड़े पैमाने पर कार्रवाई होना लगभग तय है।






