बच्चों में किडनी रोग बढ़ना गंभीर संकेत: CM योगी
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SGPGI में नेफ्रोलॉजी अधिवेशन, इंसेफ्लाइटिस पर यूपी मॉडल का जिक्र
संवाद 24। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बच्चों में क्रोनिक किडनी डिजीज के बढ़ते मामले समाज और स्वास्थ्य तंत्र—दोनों के लिए चेतावनी हैं। उन्होंने संतुलित जीवनशैली और समय पर उपचार को ही इस चुनौती का स्थायी समाधान बताया। लखनऊ स्थित SGPGI में इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में इंसेफ्लाइटिस के उन्मूलन का उदाहरण देते हुए कहा कि सुनियोजित प्रयासों और सशक्त स्वास्थ्य ढांचे से असंभव दिखने वाली चुनौतियों पर भी विजय पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि SGPGI स्थापना के समय से ही मानव सेवा का केंद्र रहा है और 2017 के बाद प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल को संसाधनों की कमी नहीं होने दी गई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1947 से 2017 तक प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब यह संख्या 80 तक पहुंच चुकी है, जो करीब 25 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना काल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस संकट में सरकारी अस्पतालों ने तकनीक और टेलीमेडिसिन के जरिए प्रभावी इलाज उपलब्ध कराया। उन्होंने यह भी बताया कि एक ही वर्ष में राज्य सरकार ने इलाज के लिए 1300 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए और आयुष्मान भारत योजना के तहत साढ़े पांच करोड़ से अधिक गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे किडनी रोगियों को भी बेहतर इलाज मिल रहा है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य और खानपान पर जोर देते हुए कहा कि संयमित भोजन और तरल पदार्थों का संतुलित सेवन ही सेहत की कुंजी है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि “संयम चलेगा, लेकिन अति नहीं,” जिस पर सभागार में मौजूद चिकित्सकों और प्रतिनिधियों के बीच मुस्कान फैल गई।
स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों से अयोध्या दर्शन का आग्रह किया और कहा कि 500 वर्षों बाद बने राम मंदिर का दर्शन अवश्य करें। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधियों के लिए दर्शन व्यवस्था का अनुरोध भी किया।
अधिवेशन के आयोजन सचिव प्रो. नारायण प्रसाद ने बताया कि 25 देशों के विशेषज्ञ चार दिनों तक किडनी रोगों के आधुनिक उपचार पर मंथन करेंगे। बिना चीरा लगाए की जाने वाली इंटरवेंशनल नेफ्रोलॉजी तकनीकों, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी, पीडियाट्रिक और क्रिटिकल केयर नेफ्रोलॉजी जैसे विषयों पर वर्कशॉप होंगी।
नेफ्रोलॉजी विभाग की प्रो. अनुपमा कौल के अनुसार, SGPGI ने अगले वर्ष से सालाना 250 किडनी ट्रांसप्लांट का लक्ष्य तय किया है।






