पैसे न देने पर अस्पताल ने रोका शव, पिता को सड़क पर मांगनी पड़ी भीख, बरेली की घटना ने मानवता को किया शर्मसार
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संवाद 24 बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि इलाज के बाद भी पूरी रकम न मिलने पर उसने मृत युवक का शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर मृतक के पिता को सड़क किनारे भीख मांगनी पड़ी, ताकि वह अस्पताल का बकाया चुका सके और अपने बेटे का शव ले जा सके।
क्या है पूरा मामला
बदायूं जिले के हजरतपुर थाना क्षेत्र के नगरिया कला गांव निवासी श्यामलाल का बेटा धर्मवीर कुछ दिन पहले सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन उसे इलाज के लिए बरेली के पीलीभीत बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर आए। करीब 16 दिन तक अस्पताल में इलाज चला, इस दौरान परिवार ने इलाज पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च कर दिए।
इलाज के दौरान धर्मवीर की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से पहले 2.5 लाख रुपये और जमा करने की मांग की। परिवार के पास इतनी रकम नहीं थी।
शव न मिलने पर पिता ने मांगी भीख
रुपयों की व्यवस्था न हो पाने पर अस्पताल स्टाफ ने शव सौंपने से इनकार कर दिया। इसी बीच मृतक के पिता श्यामलाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें वह सड़क किनारे लोगों से भीख मांगते नजर आ रहे हैं। वह लोगों से मदद मांग रहे थे ताकि अस्पताल का पैसा चुका सकें और बेटे का शव घर ले जा सकें।
(हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।)
पुलिस के पहुंचने पर सुलझा मामला
वीडियो वायरल होने के बाद इज्जतनगर पुलिस को मामले की जानकारी मिली। पुलिस टीम तत्काल निजी अस्पताल पहुंची और पूरे प्रकरण की जांच की। जांच में पुष्टि हुई कि मामला बदायूं जिले के नगरिया कला गांव के परिवार से जुड़ा है।
पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन और मृतक के परिजनों से बातचीत कर दोनों पक्षों में समझौता कराया। इसके बाद शव का पंचनामा भरकर परिजनों को सौंप दिया गया।
अस्पताल पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूलने और फिर शव तक रोक लेने के आरोपों ने आम लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि स्थिति को शांत करा दिया गया है और शव परिजनों को सौंप दिया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।






