बांके बिहारी मंदिर में ‘स्पेशल पूजा’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले— भगवान को भी चैन से सोने नहीं देते
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संवाद 24, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में पैसे लेकर अमीर श्रद्धालुओं को विशेष पूजा कराने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंदिर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से भगवान के विश्राम के समय में भी दखल दिया जा रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि भगवान के आराम का भी एक तय समय होता है, जिसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
यह मामला मंदिर की हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी द्वारा दर्शन का समय प्रतिदिन करीब ढाई घंटे बढ़ाने के फैसले से जुड़ा है। कमेटी ने 12 सितंबर को हुई बैठक में यह निर्णय लिया था, जिसके खिलाफ मंदिर के गोस्वामियों (सेवायतों) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

दर्शन समय में बदलाव पर कड़ी टिप्पणी
याचिका पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि दर्शन के समय में बदलाव से मंदिर से जुड़ी पारंपरिक विधि-विधान भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के जगने, विश्राम करने और शयन का समय तय होता है और इसमें प्रशासनिक आधार पर बदलाव नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश ने विशेष रूप से उस प्रथा पर सवाल उठाया, जिसमें आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर बंद रहने के दौरान प्रभावशाली लोग मोटी रकम देकर विशेष पूजा करा लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान के आराम के समय में भी उन्हें चैन से नहीं सोने दिया जाता, जो आस्था और परंपरा दोनों के खिलाफ है।
सेवायतों ने भी जताई आपत्ति
सेवायतों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने दर्शन समय में बदलाव का विरोध करते हुए कहा कि पूजा का समय पवित्र होता है और यह केवल प्रशासनिक विषय नहीं है। उन्होंने दलील दी कि सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार भगवान बांके बिहारी के बाल स्वरूप की सेवा होती है, इसलिए उनके विश्राम का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस पर CJI ने कहा कि दोपहर में मंदिर बंद होने के बाद भी भगवान को एक पल का आराम नहीं मिलता और स्पेशल पूजा के नाम पर उनका शोषण किया जा रहा है। वकील ने भी कोर्ट की इस टिप्पणी से सहमति जताई और कहा कि भगवान के विश्राम काल में किसी भी तरह के विशेष दर्शन या पूजा की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
प्रबंध समिति और यूपी सरकार को नोटिस
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल हैं, ने मंदिर की प्रबंध समिति से जवाब तलब किया है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह में तय की है।
देहरी पूजा और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी सवाल
सेवायतों के वकील नरेंद्र गोस्वामी ने कोर्ट को बताया कि प्रबंध समिति ने न सिर्फ दर्शन का समय बढ़ाया है, बल्कि पारंपरिक देहरी पूजा को भी रोका गया है। इसके अलावा मंदिर की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए नियमों के विपरीत एक कंपनी को काम दिए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है।
बालभोग में देरी का मामला
इसी बीच सोमवार को बांके बिहारी मंदिर में पहली बार बालभोग समय पर नहीं लग सका। प्रबंध समिति द्वारा नियुक्त हलवाई को समय पर भुगतान न मिलने के कारण भोग तैयार नहीं हो पाया। बाद में हस्तक्षेप के बाद लगभग डेढ़ घंटे की देरी से भगवान को बालभोग अर्पित किया गया। बताया गया कि हलवाई को हर महीने 90 हजार रुपए का भुगतान होना है, जो समय पर नहीं किया जा रहा।
भीड़ नियंत्रण के नाम पर बढ़ाया गया था समय
प्रबंध समिति ने दर्शन का समय बढ़ाने का फैसला भीड़ नियंत्रण के तर्क पर लिया था। हालांकि, गोस्वामियों का कहना है कि भगवान बांके बिहारी की सेवा बाल रूप में होती है और उन्हें पर्याप्त विश्राम की आवश्यकता होती है। मान्यता के अनुसार भगवान रात में निधिवन में रासलीला के लिए जाते हैं, इसलिए उन्हें सुबह जल्दी जगाया जाना भी परंपरा के विरुद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस संवेदनशील धार्मिक और प्रशासनिक मुद्दे पर अंतिम फैसला करेगा।






