अनिरुद्धाचार्य का आरोप: इंटरनेशनल मीडिया से जान का खतरा, झूठी FIR की खबर फैलाने का दावा
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संवाद 24 डेस्क। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने मीडिया के एक वर्ग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मीडिया संस्थान सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं और टीआरपी के लिए उनके खिलाफ झूठी खबरें चला रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की अफवाहों से उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।
13 दिसंबर को मथुरा में कथा के दौरान अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उन्हें टीवी के माध्यम से पता चला कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसकी सच्चाई जानने के लिए वह खुद थाने पहुंचे, जहां थाना प्रभारी ने उन्हें बताया कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मीडिया ने बिना पुष्टि किए झूठी खबरें प्रसारित कीं।
अनिरुद्धाचार्य ने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान टीआरपी के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहले मंथरा साजिश रचती थी, आज वही काम मीडिया कर रहा है। उनका दावा है कि मीडिया उनके चरित्र को बदनाम करने के लिए पैसे के दम पर झूठे आरोप भी लगवा सकती है और यहां तक कि उनकी हत्या कराने की भी साजिश रची जा सकती है।
उन्होंने कहा कि वह सनातन धर्म की सेवा कर रहे हैं, लोगों को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर कर रहे हैं और यही वजह है कि कुछ व्यावसायिक हितों को नुकसान हो रहा है। उनके मुताबिक, गुटखा और शराब जैसे उत्पादों के कारोबार से जुड़े लोग उनसे नाराज हैं और इसी कारण मीडिया के जरिए उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है।
अनिरुद्धाचार्य ने यह भी कहा कि देश में जबरन धर्मांतरण जैसी गंभीर समस्याओं पर मीडिया चुप रहती है, क्योंकि इससे टीआरपी नहीं मिलती। वहीं, उनके आश्रम में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए किए जा रहे कार्य—जैसे भोजन, इलाज और आवास की व्यवस्था—को मीडिया कभी नहीं दिखाता।
इस बयान के बाद मथुरा के पत्रकारों में नाराजगी देखी गई है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि सार्वजनिक मंच से इस तरह के बयान देना अनुचित है और इससे पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुंचती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस मामले की शिकायत प्रेस काउंसिल, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक की जाएगी तथा जरूरत पड़ने पर साधु-संतों से भी मुलाकात की जाएगी।
फिलहाल, अनिरुद्धाचार्य के बयान को लेकर धार्मिक और मीडिया जगत में बहस तेज हो गई है।






