यूपी BJP अध्यक्ष का नाम फाइनल, OBC वर्ग को मिलेगी कमान: PM मोदी से 35 मिनट मुलाकात के बाद तस्वीर साफ
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संवाद 24 (लखनऊ/नई दिल्ली) यूपी में बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय कर लिया गया है। पार्टी ने यह निर्णय कर लिया है कि कमान OBC वर्ग के नेता को ही दी जाएगी। आधिकारिक घोषणा 14 दिसंबर को लखनऊ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल करेंगे।
गुरुवार को दिल्ली में पार्टी की शीर्ष बैठक हुई, जिसमें मौजूदा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी शामिल हुए। वे तीन दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। इसी दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 35 मिनट की अहम मुलाकात हुई, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो गई।
कौन हैं प्रमुख दावेदार?
OBC वर्ग से सबसे आगे ये नाम
- पंकज चौधरी (केंद्रीय मंत्री)
- बीएल वर्मा
- धर्मपाल सिंह (यूपी मंत्री)
अन्य OBC चेहरे जिनकी चर्चा बढ़ी
- केशव प्रसाद मौर्य (उपमुख्यमंत्री)
- स्वतंत्र देव सिंह
- साध्वी निरंजन ज्योति
- बाबूराम निषाद
ब्राह्मण चेहरों में ये नाम सुर्खियों में
- डॉ. दिनेश शर्मा (पूर्व डिप्टी CM, राज्यसभा सदस्य)
- बृजेश पाठक (उपमुख्यमंत्री)
- हरीश द्विवेदी (पूर्व सांसद)
हालांकि पार्टी सूत्रों की मानें तो OBC नेतृत्व को ही तरजीह देने का फैसला लगभग तय है।
नामांकन और चुनाव की प्रक्रिया
- 14 दिसंबर (शनिवार): लखनऊ में नामांकन दोपहर 1 से 2 बजे तक
- 15 दिसंबर (रविवार): प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा
चुनाव अधिकारी पीयूष गोयल और पर्यवेक्षक विनोद तावड़े की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी होगी।
प्रदेश में 84 जिलों से 380 से अधिक प्रांतीय परिषद सदस्य वोटर हैं, लेकिन मतदान की नौबत नहीं आएगी क्योंकि यह चुनाव निर्विरोध होने जा रहा है।
क्यों जरूरी है OBC नेतृत्व?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—
- OBC वर्ग की आबादी सबसे बड़ी, 2027 विधानसभा चुनौतियों के मद्देनज़र
- बीजेपी अपनी सामाजिक इंजीनियरिंग और जातीय संतुलन को और मजबूत करना चाहती है
- SP के OBC बेस में सेंध लगाने की रणनीति
- आगामी लोकसभा, पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी
किस चेहरे का क्या राजनीतिक संदेश होगा?
- स्वतंत्र देव सिंह / डॉ. दिनेश शर्मा
→ संकेत: पार्टी नेतृत्व प्रदेश में संगठन को ‘फुल कंट्रोल मोड’ देना चाहता है। - केशव मौर्य / बृजेश पाठक
→ संकेत: सरकार–संगठन का संतुलन बनाए रखने की कोशिश। - साध्वी निरंजन ज्योति
→ संकेत: यूपी में राजनीति का नैरेटिव पूरी तरह ‘भगवा नेतृत्व’ के इर्द-गिर्द तैयार करना।
अब अगला कदम—योगी मंत्रिमंडल विस्तार
नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही योगी सरकार 2.0 में दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार लगभग तय माना जा रहा है।
क्यों जरूरी है विस्तार?
- दो कैबिनेट पद खाली
- जातीय प्रतिनिधित्व का संतुलन
- आगामी पंचायत चुनावों की तैयारी
- दलित और OBC प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति
मंत्रियों के कामकाज से नाराजगी को देखते हुए कुछ चेहरों को हटाया भी जा सकता है, हालांकि चुनाव से पहले बड़े बदलावों पर मतभेद भी हैं।
यूपी बीजेपी: 11 महीने से इंतजार
प्रदेश अध्यक्ष का पद जनवरी 2025 से खाली था, लेकिन
- महाराष्ट्र चुनाव
- यूपी उपचुनाव
- बिहार चुनाव
के कारण प्रक्रिया टलती रही।
16 दिसंबर से खरमास शुरू होने से पहले 14 दिसंबर को चुनाव कराया जा रहा है।






