यात्री ध्यान दें! परिवहन मंत्री का मास्टरस्ट्रोक: यूपी के सभी एयरपोर्ट-स्टेशन अब होंगे इंटरकनेक्टेड
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिवहन परिदृश्य में एक अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है। ‘कनेक्टिविटी व लॉजिस्टिक्स क्षमता को अनलॉक करने’ विषय पर आयोजित एक कॉन्फ़्रेंस में राज्य के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह ने घोषणा की है कि यात्रियों के सफर को आसान, सुगम और निर्बाध बनाने के उद्देश्य से अब राज्य के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों को आपस में जोड़ा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की कनेक्टिविटी को अधिकतम करना है, जिससे न केवल आम नागरिकों को बल्कि निवेशकों और पर्यटकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य: यात्रा सुगमता और मल्टीमॉडल हब का निर्माण
परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, यह पहल ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ के विज़न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य यात्रियों को प्रथम मील से अंतिम मील तक की यात्रा में शून्य बाधा (Zero Obstruction) प्रदान करना है।” वर्तमान में, विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच एक सहज इंटरफ़ेस की कमी यात्रियों के लिए अक्सर एक चुनौती बन जाती है।
इस नई योजना के तहत, सरकार का लक्ष्य इन दो महत्वपूर्ण परिवहन ‘पोर्टल’ के बीच दक्ष और एकीकृत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी हब स्थापित करना है। इसका अर्थ यह होगा कि यात्रियों को दोनों स्थानों के बीच आवागमन के लिए हाई-स्पीड बस सेवाएं, मेट्रो या लाइट रेल कनेक्टिविटी (जहाँ संभव हो), और आधुनिक टैक्सी सेवाओं सहित कई सहज विकल्प उपलब्ध होंगे। यह न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि यात्रियों को एक ही टिकट या एक ही एकीकृत प्रणाली के माध्यम से अपनी पूरी यात्रा की योजना बनाने की सुविधा भी देगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स पर गहरा प्रभाव
इस कनेक्टिविटी विस्तार का प्रभाव केवल यात्री सुविधा तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह योजना राज्य के लॉजिस्टिक्स और कार्गो व्यवसाय को भी एक नई दिशा देगी। कार्यक्रम में उपस्थित अपर मुख्य सचिव श्रीमती अर्चना अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि बेहतर इंटरकनेक्टिविटी से माल ढुलाई और वितरण की प्रक्रिया अधिक कुशल हो जाएगी, जिससे यूपी भारत के एक प्रमुख वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।
योजना के कार्यान्वयन के लिए परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) मिलकर काम करेंगे। प्रमुख सचिव (पीडब्ल्यूडी) श्री अजय चौहान ने बताया कि इसमें नई एक्सेस सड़कों का निर्माण, मौजूदा सड़कों का उन्नयन, और विशेष रूप से ईवी चार्जिंग स्टेशन जैसे आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास शामिल है। यह पहल राज्य सरकार की ‘विजन 2047’ रोडमैप का एक अभिन्न हिस्सा है।
आर्थिक और पर्यटन को बढ़ावा
बेहतर कनेक्टिविटी सीधे तौर पर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी है। प्रमुख सचिव (योजना) श्री आलोक कुमार ने रेखांकित किया कि जब यात्रा आसान होती है, तो व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं और निवेशक आसानी से राज्य के प्रमुख शहरों तक पहुंच सकेंगे।
इसके अलावा, पर्यटन क्षेत्र को भी इस योजना से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रबंध निदेशक (परिवहन निगम) श्री प्रभु एन सिंह ने बताया कि विशेष वातानुकूलित शटल सेवाएं शुरू की जाएंगी, जो पर्यटकों को एयरपोर्ट से उतरकर सीधे रेलवे स्टेशन के माध्यम से धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक आसानी से पहुंचाएंगी।
कार्यान्वयन की रणनीति: चरणबद्ध दृष्टिकोण
परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह ने संकेत दिया है कि इस विशाल परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और व्यस्त घरेलू हवाई अड्डों (जैसे जेवर, लखनऊ, वाराणसी) को आसपास के बड़े रेलवे जंक्शनों से जोड़ा जाएगा।
परिवहन आयुक्त श्रीमती किंजल सिंह ने आश्वासन दिया कि कार्यकारी अधिकारियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें भूमि अधिग्रहण, वित्तीय मॉडल और समय-सीमा का स्पष्ट खाका होगा। पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी और स्मार्ट तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की यह पहल राज्य के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों के बीच एकीकृत कनेक्टिविटी स्थापित करके, सरकार न केवल यात्रियों की यात्रा को सुविधाजनक बना रही है, बल्कि राज्य की समग्र लॉजिस्टिक्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षमता को भी मजबूत कर रही है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ से आगे बढ़कर ‘ग्लोबल कनेक्टिविटी सेंटर’ बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे राज्य एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने विज़न को और गति दे पाएगा।






