प्राणों की आहुति देने वालों को मिली शांति
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संवाद 24 अयोध्या।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वजारोहण समारोह को सभी के लिए साध्यता का दिवस बताया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में संघर्ष किया, प्राणों की आहुति दी, आज उनकी स्वर्णिम आत्मा तृप्त हुई होगी। डॉ. भागवत ने कहा कि यह दिव्य घटना महज धर्मप्रवर्तन नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रवर्तन की प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ सदियों पुरानी प्रतीक्षा का अंत हुआ है। मंदिर आंदोलन में प्राण देने वालों की प्रार्थना थी कि विश्व को शांति और सद्भावना का संदेश मिले तथा धर्म, ज्ञान और सेवा का सुपथ संपूर्ण विश्व में पहुंचे।
सरसंघचालक ने कहा कि राम की पूजा केवल भाव से होती है। उनके आदर्शों का स्मरण कर मानवता को प्रेरणा लेनी चाहिए। धर्म की प्रतिष्ठा और समाज को सुदृढ़ बनाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान भी है।
डॉ. भागवत ने कहा कि राम चरित में त्याग, करुणा और आदर्श जीवन का सर्वोत्तम प्रतिमान मिलता है। यही भाव सृष्टि को दिशा देगा और भारत को विश्व में मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करेगा।






