UP में घुसपैठियों पर योगी सरकार का कड़ा प्रहार, हर जिले में बनेगा डिटेंशन सेंटर, DM को जारी हुए सख्त आदेश
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई का संकेत दे दिया है। प्रदेश की कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने सभी जिलाधिकारियों (DMs) को त्वरित और सख्त कदम उठाने का आदेश जारी किया है। योगी सरकार का यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब देश के 11 राज्यों में SIR (विशेष पहचान और समीक्षा) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी चरम पर है।
सरकार के नए निर्देशों के तहत प्रदेश के हर जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाए जाएंगे, जहां अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा। यहां उनका सत्यापन, पहचान और आगे की सभी कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की जाएंगी। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर निर्णायक नीति की ओर बड़ा संकेत माना जा रहा है।
क्या है योगी सरकार की नई कार्ययोजना?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों को भेजे आदेशों में स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी रह रहे अवैध घुसपैठियों को चिन्हित करना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि, संदिग्ध पहचान या गैर-कानूनी प्रवेश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के आदेशों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- हर जिले में अवैध घुसपैठियों की पहचान
जिला प्रशासन को अपने-अपने क्षेत्रों में रहने वाले अवैध रूप से भारत आए विदेशी नागरिकों की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय थाना, खुफिया विभाग और नागरिक सुविधाओं से जुड़े विभागों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। - अस्थायी डिटेंशन सेंटर की स्थापना
प्रत्येक जनपद में एक अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा।
इन केंद्रों में उन व्यक्तियों को रखा जाएगा जिनकी नागरिकता विदेशी है और जिन्होंने भारत में बिना वैध दस्तावेज प्रवेश किया है। सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इन्हें यहीं रखा जाएगा। - सत्यापन के बाद निर्वासन (Deportation)
डिटेंशन सेंटर में रखे गए लोगों को ‘नियमानुसार’ उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यह प्रक्रिया केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय, और संबंधित देशों के दूतावासों के साथ समन्वय करके की जाएगी।
घुसपैठियों पर सख्त रुख, योगी ने पहले भी दिए थे संकेत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में बिहार चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि यदि NDA सत्ता में आती है, तो घुसपैठियों को राज्य से बाहर किया जाएगा और उनकी संपत्ति गरीबों में बांटने पर भी विचार होगा। यह बयान उस व्यापक राष्ट्रीय नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देशभर में अवैध घुसपैठ को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है SIR प्रक्रिया और क्यों बढ़ रही है राजनीतिक गर्मी?
देश के 11 राज्यों में इन दिनों SIR (Special Identification and Review) प्रक्रिया चल रही है। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है, जिनकी नागरिकता या दस्तावेजों पर संदेह है।
सरकार का दावा:
यह प्रक्रिया सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। इससे गैर-कानूनी तरीके से देश में बसे लोगों की पहचान की जा सकेगी।
विपक्ष का आरोप:
SIR का उद्देश्य वंचित समुदायों को निशाना बनाना है। मतदाता सूचियों से गरीब और वंचित समूहों के नाम हटाने का आरोप लगाया गया है। पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर काफी विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। राजनीतिक विवाद के बीच योगी आदित्यनाथ का यह नया आदेश यूपी में सख्त प्रशासनिक कदम का संकेत देता है।
क्यों जरूरी हुआ ऐसा एक्शन?
विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध घुसपैठ न केवल सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम है, बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम भी गंभीर होते हैं।
- फर्जी पहचान पत्र बनवाकर अपराध में शामिल होने की संभावनाएं
- स्थानीय संसाधनों पर भार
- जनसांख्यिकीय संतुलन पर प्रभाव
- सामाजिक तनाव की बढ़ती आशंकाएं
कई पुलिस जांचों और खुफिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि अवैध रूप से रह रहे कुछ लोग आतंकी संगठनों या अवैध गतिविधियों से जुड़े पाए गए हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और घनी आबादी वाले राज्य में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डिटेंशन सेंटर, कैसे होंगे और क्या होगी भूमिका?
योगी सरकार द्वारा प्रस्तावित अस्थायी डिटेंशन सेंटरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। इन केंद्रों में –
- अवैध घुसपैठियों का पंजीकरण
- बायोमैट्रिक और दस्तावेज़ सत्यापन
- खुफिया जांच
- स्वास्थ्य जांच
- भोजन, प्राथमिक सुविधाएं
- और अंत में, निर्वासन हेतु कानूनी प्रक्रिया
सभी गतिविधियाँ एक जगह संपन्न होंगी। राज्य सरकार और जिला प्रशासन इन केंद्रों के लिए स्थान, संसाधन और सुरक्षा सुविधाएँ तय करेंगे।
योगी सरकार का यह निर्णय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े बदलाव की ओर संकेत देता है। इसके बाद जिलाधिकारियों का बड़ा दायित्व शुरू होगा –
- अवैध घुसपैठियों की खोज
- उनकी सूची तैयार करना
- स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई
- और डिटेंशन सेंटरों को चालू करना
राजनीतिक रूप से यह मुद्दा और भी गर्माने वाला है क्योंकि SIR प्रक्रिया पर पहले से ही विपक्ष सरकार को घेर रहा है। योगी का यह सख्त कदम आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विमर्श बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ का ‘घुसपैठियों के खिलाफ अभियान’ अब निर्णायक मोड़ पर है। हर जिले में डिटेंशन सेंटर की स्थापना, पहचान की मुहिम और निर्वासन की प्रक्रिया, ये सभी कदम राज्य सरकार की आक्रामक नीति का हिस्सा हैं। जहां सरकार इसे सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार कहकर विरोध कर रहा है।
लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यूपी में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, और अवैध घुसपैठियों पर शिकंजा अब पहले से अधिक कसने वाला है।






