अंकों की दौड़ में टूटते सपने: यूपी में तीन छात्राओं की मौत ने बढ़ाई चिंता
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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश में परीक्षा के बढ़ते तनाव से जुड़ी चिंताजनक घटनाओं का सिलसिला जारी है। हाल ही में कानपुर और इटावा जिलों में तीन छात्राओं की मौत की खबर ने अभिभावकों, शिक्षा विशेषज्ञों और प्रशासन का ध्यान एक बार फिर से परीक्षा-सम्बंधी मानसिक दबाव की गंभीरता की ओर खींचा है।
सूत्रों के अनुसार, सीबीएसई और यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान छात्रों पर मानसिक दबाव और तनाव का स्तर बढ़ गया है, जिसका नतीजा दर्दनाक रूप से सामने आया। कानपुर में दो छात्राओं ने परीक्षा के दबाव को सहन न कर आत्महत्या जैसा कदम उठाया, जबकि इटावा में एक 15-वर्षीय छात्रा ने गणित परीक्षा के परिणाम से दुखी होकर अपनी जान ले ली। प्रारंभिक पुलिस जानकारी के अनुसार, इटावा मामले में छात्रा ने घर में फंदे से लटककर जीवन समाप्त कर लिया था।
ये घटनाएँ न केवल परिवारों के लिए पारिवारिक त्रासदी हैं, बल्कि व्यापक तौर पर समाज के लिए गंभीर संकेत भी हैं कि हमारी शिक्षा प्रणाली और परीक्षा-तंत्र में मानसिक स्वास्थ्य को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, “परीक्षा दबाव मानसिक स्वास्थ्य संबंधी एक बड़ा जोखिम” बन चुका है, विशेषकर उन छात्रों के लिए जो बोर्ड या प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन प्रतिस्पर्धा में हैं। इसके परिणामस्वरूप युवा मनोविज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कई बार यह संकट आत्महत्या जैसे कदमों तक ले जाता है।
उत्तरप्रदेश में इस समय उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) और अन्य परीक्षा निकायों द्वारा परीक्षाओं का संचालन कई हजार केंद्रों पर चल रहा है, जहाँ कड़ी निगरानी और नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं। प्रशासन ने छात्रों से संयम और मानसिक तनाव को कम करने की अपील भी की है।
हालाँकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल परीक्षा-संचालन के तकनीकी सुधार पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत है कि अभिभावकों, शिक्षकों और नीतिनिर्माताओं द्वारा मिलकर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन किया जाये। इसमें तनाव प्रबंधन, सलाह-सेवा, पारिवारिक समर्थन और सकारात्मक परीक्षा वातावरण का निर्माण शामिल होना चाहिए।
जैसे-जैसे परीक्षाओं के परिणाम और चुनौतियाँ अपने चरम पर पहुँच रही हैं, यह आवश्यक है कि शिक्षा के साथ छात्रों की भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक भलाई को प्राथमिकता दी जाये, ताकि युवाओं की आकांक्षाएँ प्रेरणा का स्रोत बनें, भय या संकट का नहीं।






