गेट सील, बैरिकेड टूटे: लाल बारादरी विवाद ने गरमाया विश्वविद्यालय का माहौल
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संवाद 24 डेस्क। लखनऊ विश्वविद्यालय के लाल बारादरी गेट को प्रशासन ने सील कर दिया है और वहां निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसके बाद कई छात्र संगठन सदस्यों ने इसका विरोध शुरू किया और विश्वविद्यालय प्रशासन के कदम को चुनौती दी। छात्रों ने सील किए गए क्षेत्र के पास लगे बैरिकेड तोड़ दिए और निर्माण सामग्री को बाहर फेंक दिया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
लाल बारादरी गेट परिसर का महत्व केवल एक प्रवेश द्वार का नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों में से एक है और विश्वविद्यालय परिसर की पहचान का भी हिस्सा रहा है। गेट के सील होने से छात्रों और कुछ शिक्षकों में असंतोष उभरा, जिन्हें लगता है कि बिना पर्याप्त संवाद और विस्तृत कारण बताए ऐसा निर्णय लिया गया है।
छात्र विरोध का कारण एवं मांगें
छात्र संगठनों की मुख्य मांग यह रही कि प्रशासन को किसी भी निर्माण या गेट सीलिंग फैसले से पहले परिसर समुदाय जिसमें छात्र, शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं से चर्चा करनी चाहिए थी। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी स्पष्ट सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के निर्माण कार्य शुरू कर दिया जिससे शैक्षणिक गतिविधियों में बिखराव और सुरक्षा चिंताओं का माहौल बन गया है।
छात्र नेताओं ने बताया कि यह मामला केवल किसी इमारत या गेट का संशोधन नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया और प्रशासन-छात्र संवाद की भावना का सवाल है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल संवाद स्थापित कर निर्माण कार्य को रोकने तथा सार्वजनिक बहस के लिए बैठक बुलाने की मांग की है।
हाल के हफ्तों में लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र विरोध की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं:
जनवरी में विश्वविद्यालय में छात्रों ने UGC के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने नए नियमों को छात्र-हित विरोधी करार दिया था और समानता सुनिश्चित करने के नाम पर असमानताओं के खतरों को उजागर किया था।
इसी अवधि में कुछ छात्र संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख की लखनऊ यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम में भागीदारी के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने उस कार्यक्रम के अवसर पर “Bhagwat go back” जैसे नारे लगाए और इसे शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप बताया।
ये विरोध इस बात को दर्शाते हैं कि विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षा, नीति और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच बढ़ती संवेदनशीलता है और विद्यार्थी इसे केवल रूटीन विश्वविद्यालय सूचकांक से अधिक समाजिक-राजनीतिक संदर्भों में देख रहे हैं।
प्रशासन की भूमिका
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है। लेकिन सामाजिक मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों पर यह बताया गया है कि लाल बारादरी के पास सीलिंग तथा निर्माण का निर्णय संरक्षण एवं सुरक्षा कारणों से लिया गया था, हालांकि इसका वैज्ञानिक आधार स्पष्ट नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान में निर्माण या संरचनात्मक बदलावों को लागू करने से पहले उचित शैक्षणिक अधिकारियों, भूतपूर्व छात्रों और सुरक्षितता विशेषज्ञों के साथ चर्चा आवश्यक है। इससे न केवल व्यापक समर्थन मिलेगा बल्कि विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में लाल बारादरी गेट के सील होने और उसके विरोध में छात्रों के प्रदर्शन ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है: क्या निर्णय प्रक्रिया पारदर्शिता एवं समावेशिता के साथ हुई है? आज छात्रों की मांग स्पष्ट है प्रशासन को तुरंत बातचीत के लिए तैयार होना चाहिए तथा ऐसी किसी भी नीति या निर्णय से पूर्व व्यापक सलाह-मशविरा सुनिश्चित करना चाहिए, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में शांति, शिक्षा की उत्कृष्टता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सके।






