गाजियाबाद में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा, 22 पासपोर्ट किए गए निरस्त
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संवाद 24 गाजियाबाद। फर्जी नाम और पतों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने अब तक 22 फर्जी पासपोर्ट बनवाए थे, जबकि दो अन्य आवेदनों की प्रक्रिया चल रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 22 पासपोर्ट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
पुलिस के अनुसार इस रैकेट का मुख्य एजेंट विवेक गांधी है, जो प्रत्येक पासपोर्ट के बदले करीब डेढ़ लाख रुपये तक वसूल करता था। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह सामान्य फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के तहत किया गया अपराध है।
जांच में पाया गया कि 22 आवेदकों ने फर्जी पहचान पत्रों और अधूरे पतों के सहारे पासपोर्ट प्राप्त किए। सभी आवेदन दिल्ली स्थित पासपोर्ट कार्यालय के माध्यम से किए गए थे। पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
पुलिस को जानकारी मिली है कि कुछ आवेदक उत्तर-पूर्वी राज्यों से जुड़े हो सकते हैं, जिनके पासपोर्ट भोजपुर क्षेत्र के फर्जी नाम-पतों पर जारी हुए। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों का चयन क्यों किया गया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
पासपोर्ट विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक इन फर्जी पासपोर्टों का इस्तेमाल कर कोई भी व्यक्ति देश से बाहर नहीं गया है। इसके बावजूद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम खर्च कर पासपोर्ट बनवाने का असली मकसद क्या था।
पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि यह मामला केवल अवैध विदेश भेजने तक सीमित है या इसके पीछे किसी आतंकी, फरार अपराधी या संगठित आपराधिक नेटवर्क का हाथ है। गाजियाबाद पुलिस की चार टीमें फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हैं और खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क किया गया है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों पर भी कार्रवाई तय है।






