बृजभूषण शरण सिंह को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने सुनवाई जारी रखने के दिए निर्देश।
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संवाद 24 गोंडा। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई जाएगी और ट्रायल पूर्व की तरह जारी रहेगा।
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई। हालांकि, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
सुनवाई के दौरान बृजभूषण के अधिवक्ता ने मुख्य वकील की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग की, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि याचिका दाखिल हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मामले पर गंभीर बहस नहीं की गई है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई पर ठोस बहस न होने की स्थिति में याचिका खारिज भी की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहा ट्रायल पूरी तरह से जारी रहेगा और उस पर किसी प्रकार की न्यायिक रोक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 अप्रैल निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मई 2023 में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जनवरी 2023 में छह अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवानों ने उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जिसके बाद जंतर-मंतर पर लंबे समय तक आंदोलन भी चला।
ट्रायल कोर्ट ने 21 मई 2024 को बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित आरोप तय किए थे। इस मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर भी सह-आरोपी हैं।
हालांकि, नाबालिग पहलवान से जुड़े एक अलग मामले में 26 मई 2025 को पटियाला हाउस कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया था, लेकिन बालिग महिला पहलवानों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया अब भी जारी है।






