मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद नई रोशनी इडॉफ लेंस से दूर-पास सब दिखेगा साफ
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संवाद 24 संवाददाता। मोतियाबिंद से जूझ रहे मरीजों के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल से एक राहत भरी खबर सामने आई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में किए गए शोध के बाद यह साबित हुआ है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान लगाए जाने वाले नए इडॉफ (EDOF) लेंस से मरीजों को न सिर्फ दूर की, बल्कि बीच की दूरी की चीजें भी साफ दिखाई देंगी। इससे ड्राइविंग, कंप्यूटर पर काम और मोबाइल देखने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां कहीं अधिक आसान हो जाएंगी।
अब तक मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद लगाए जाने वाले सामान्य मोनोफोकल लेंस से मरीजों को दूर की दृष्टि तो स्पष्ट मिलती थी, लेकिन नजदीक और बीच की दूरी के लिए उन्हें मोटे चश्मे का सहारा लेना पड़ता था। वहीं मल्टीफोकल लेंस में कई मरीजों को बीच में रिंग दिखने की समस्या होती थी, जिससे देखने में असहजता आती थी। नए इडॉफ लेंस में यह समस्या नहीं पाई गई है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन के नेतृत्व में इस लेंस पर एक वर्ष तक शोध किया गया। इस अध्ययन में 200 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 100 मरीजों को इडॉफ लेंस और 100 को मोनोफोकल लेंस लगाए गए। शोध के नतीजों में सामने आया कि इडॉफ लेंस से दृष्टि की गुणवत्ता बेहतर रही और मरीजों को रोजमर्रा के कामों में ज्यादा सुविधा मिली।
डॉ. शालिनी के अनुसार, मल्टीफोकल लेंस डायबिटीज, रेटिनोपैथी और कुछ अन्य नेत्र रोगों वाले मरीजों में नहीं लगाए जा सकते, लेकिन इडॉफ लेंस इन मरीजों के लिए भी सुरक्षित और उपयोगी साबित हो रहे हैं। इस लेंस से दूर, बीच और काफी हद तक नजदीक की दृष्टि कवर हो जाती है, जिससे चश्मे की जरूरत कम हो जाती है।
इडॉफ लेंस लगाने के बाद मरीजों को कार और बाइक चलाने, कंप्यूटर स्क्रीन देखने, मोबाइल पर पढ़ने और रंगों व कंट्रास्ट को बेहतर ढंग से पहचानने में मदद मिलती है। इससे क्वालिटी ऑफ विजन में स्पष्ट सुधार देखा गया है। शोध में 45 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मरीज शामिल किए गए थे।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि हैलट अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में अब यह इडॉफ लेंस निशुल्क लगाए जाएंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी आधुनिक तकनीक का लाभ मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, यह शोध न सिर्फ मोतियाबिंद उपचार में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि हजारों मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।






