कम यात्री वाले रेलवे आरक्षण काउंटर होंगे मर्ज, रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला
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संवाद 24 प्रयागराज। भारतीय रेलवे बोर्ड ने अपनी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) नीति में संशोधन करते हुए यह निर्णय लिया है कि वे उन आरक्षण काउंटरों की नीतिगत समीक्षा करेंगे जहाँ प्रतिदिन 25 से कम टिकट लेन-देन होता है। ऐसे काउंटरों पर यह तय किया गया है कि उनकी उपयोगिता, लागत-लाभ और यात्रियों की जरूरतों के आधार पर समीक्षा की जाएगी, ताकि रेलवे की सेवा दक्षता तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
रेलवे बोर्ड का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से टिकट बुकिंग और एआरएस (आंतरिक आरक्षण सेवा) संचालन अधिक पारदर्शी और दक्ष बन सकते हैं। इस नीति के तहत उन काउंटरों पर नई रणनीतियाँ लागू की जा सकती हैं जहाँ ऑफ़लाइन लेन-देन बहुत कम है, ताकि रेलवे अपना परिचालन खर्च घटा सके और यात्रियों को डिजिटल माध्यमों पर निर्भर करने के लिए प्रोत्साहित कर सके।
इस नीति समीक्षा से उन स्थानों पर जहां कम यात्री आरक्षण काउंटर का उपयोग करते हैं, वहाँ काउंटर सेवा का स्वरूप बदल सकता है, जैसे कि यूनिफाइड UTS-PRS काउंटर का संचालन या PRS सेवा का बंद होना। इससे रेलवे कर्मचारियों के आवंटन और यात्रियों की टिकटिंग प्राथमिकताओं में बदलाव आने की संभावना है। रेलवे का उद्देश्य है कि संसाधन उन स्थानों पर अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किए जाएँ जहाँ टिकट मांग अधिक है, और कम ट्रैफिक वाले काउंटरों के कामकाज पर पुनर्विचार हो।
रेलवे बोर्ड की नीति समीक्षा की पृष्ठभूमि में यह साफ़ संकेत है कि ऑनलाइन और मोबाइल टिकटिंग प्लेटफॉर्म के उपयोग को प्रोत्साहन देने पर जोर है, ताकि यात्रियों को तेज़, सुविधाजनक और कम-जटिल टिकटिंग अनुभव मिल सके। इसके लिए रेलवे संभावित रूप से कुछ कम-ट्रैफिक वाले PRS काउंटरों को बंद या संयोजित कर सकता है, जहाँ लेन-देन अत्यंत कम है। इस तरह के कदम का उद्देश्य परिचालन लागत को कम करना और रेलवे की संसाधन क्षमता का बेहतर प्रवाह सुनिश्चित करना है।






