बरेली में किसान के मुआवजे में घोटाला, बिजली विभाग का लिपिक निलंबित
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संवाद 24 बरेली। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर किसान की मौत के बाद दी गई मुआवजा राशि में गड़बड़ी का मामला सामने आने पर बिजली विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। किसान के परिजनों को मिली आर्थिक सहायता में से 1.48 लाख रुपये हड़पने के आरोप में बिजली विभाग के एक लिपिक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि मामले में संलिप्त अधिवक्ता को विभागीय पैनल से हटाने की संस्तुति की गई है।
मामला फरीदपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिमरा बोरीपुरी का है, जहां हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से किसान नवनीत कुमार की मौत हो गई थी। शासन की ओर से मृतक के आश्रितों को 5.93 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई थी। आरोप है कि इस राशि में से बिजली विभाग के लिपिक और एक अधिवक्ता ने 1.48 लाख रुपये अपने पास रख लिए।
पीड़िता आकांक्षा ने पांच दिन पूर्व विकास भवन में आयोजित किसान दिवस के दौरान जिलाधिकारी अविनाश सिंह से पूरे मामले की शिकायत की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल मुख्य अभियंता को तलब किया। जांच के बाद दो घंटे के भीतर पीड़िता को पूरी धनराशि वापस करा दी गई।
प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए अधीक्षण अभियंता ग्रामीण ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने कार्यकारी सहायक एवं बिजली वितरण खंड बहेड़ी में तैनात लिपिक समीरउद्दीन को निलंबित कर अधिशासी अभियंता, बिजली वितरण खंड आंवला कार्यालय से संबद्ध कर दिया।
जांच में लिपिक को कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही, सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के उल्लंघन और विभाग की छवि धूमिल करने का दोषी पाया गया। वहीं, मामले में अधिवक्ता शिव कुमार शर्मा की भूमिका भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर उन्हें विभागीय पैनल से हटाने के लिए मुख्यालय को संस्तुति पत्र भेजा गया है।
प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मुआवजा वितरण प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा।






