यूपी की सियासत में वर्चस्व की जंग, सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने आए ओपी राजभर और अनिल राजभर गुट
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। राजभर समाज के दो प्रमुख नेताओं—प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर और अनिल राजभर—के समर्थक महाराजा सुहेलदेव जयंती समारोह के दौरान आमने-सामने आ गए। सार्वजनिक मंच पर हुए इस विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
महाराजा सुहेलदेव की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में अनिल राजभर मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद थे। बड़ी संख्या में राजभर समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए थे और इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा था। इसी दौरान कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर के समर्थकों के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने और नारेबाजी शुरू करने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नारेबाजी तेज होने पर मंच पर मौजूद अनिल राजभर नाराज नजर आए। उन्होंने अपना संबोधन बीच में रोकते हुए नारेबाजी कर रहे लोगों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। आरोप है कि इस दौरान मंच से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को देखते हुए आयोजकों और स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर मामला संभाला।
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। वायरल वीडियो में मंच से गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे राजभर समाज की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी उजागर होती दिख रही है। इस घटनाक्रम के बाद समाज की एकता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल समर्थकों की नारेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजभर समाज में नेतृत्व और प्रभाव को लेकर लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पर्धा है। जहां ओपी राजभर वर्तमान में भाजपा गठबंधन के तहत सरकार में मंत्री हैं, वहीं अनिल राजभर खुद को समाज का स्वतंत्र और मजबूत नेता बताकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि यह मामला सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं के बीच बढ़ती अंदरूनी खींचतान को दर्शाता है। वहीं सत्तारूढ़ खेमे में भी इस घटना को लेकर असहजता देखी जा रही है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
महाराजा सुहेलदेव जैसे ऐतिहासिक और समाज को जोड़ने वाले महापुरुष की जयंती पर हुए इस विवाद को लेकर समाज के वरिष्ठ लोगों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह के आयोजनों को राजनीतिक टकराव का मंच नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने का माध्यम बनाना चाहिए।
आगामी चुनावों को देखते हुए राजभर समाज की राजनीतिक भूमिका अहम मानी जा रही है। ऐसे में यह टकराव आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सियासत को और अधिक गर्मा सकता है।






