माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर सख्ती, प्रवेश पर प्रतिबंध की चेतावनी
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संवाद 24 प्रयागराज। माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद तेज हो गया है। मेला प्राधिकरण ने उन पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उनके प्रवेश पर स्थाई रूप से प्रतिबंध लगाने और आवंटित जमीन व सुविधाएं रद्द करने की चेतावनी जारी की है।
प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजते हुए कहा कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन उन्होंने सुरक्षा बैरियर तोड़ा और बिना अनुमति भीड़ के बीच बैग्गी/पालकी ले जाने की कोशिश की, जिससे भीड़-प्रबंधन में मुश्किलें पैदा हुईं। अगर 48 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो उन्हें मेले में प्रवेश से हमेशा के लिए रोक दिया जाएगा।
नोटिस मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे अपमानजनक बताया और कहा कि आरोप निराधार हैं। उनकी ओर से प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि नोटिस को वापस नहीं लिया गया तो मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
स्वामी ने यह भी कहा कि वे अपने अनुयायियों के साथ धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बिना किसी अवैध वाहन के पालकी से संगम की ओर गए थे, और आरोपों को फर्जी बताया।
मेला प्रशासन ने सिर्फ अनुशासनहीनता का ही मुद्दा नहीं बनाया है, बल्कि स्वामी के ‘शंकराचार्य’ उपाधि के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। मेला में लगाए गए बोर्डों पर वह उपाधि उपयोग करने पर प्रशासन ने सवाल उठाया और कहा कि इस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है।
स्वामी के वकील ने इस नोटिस का विवरणात्मक जवाब देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल पद संभालने की प्रक्रिया पर रोक लगाई थी, उपाधि को उपयोग न करने का कोई आदेश नहीं दिया था। वह इस फैसले को चुनौती देंगे।
माघ मेला प्रयागराज का एक प्राचीन धार्मिक आयोजन है जिसमें श्रद्धालु संगम (गंगा-यमुना के संगम) में पवित्र स्नान करते हैं। मौनी अमावस्या जैसे विशेष दिनों पर लाखों लोग उपस्थित होते हैं और प्रशासन सुरक्षा-व्यवस्था पर विशेष ध्यान देता है।






