वाराणसी विकास कार्यों पर सियासत तेज, अखिलेश बोले– मंदिर तोड़ने का रिकॉर्ड भाजपा के नाम
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संवाद 24 लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि “धरती पर शायद ही किसी राजा ने इतने मंदिर नहीं तोड़े होंगे, जितने भाजपा सरकार के दौरान पौराणिक मंदिरों को तोड़ा गया है।” उनके अनुसार भाजपा को इतिहास, विरासत और पुरातन संरक्षन की समझ नहीं है और यह इतिहास मिटाकर अपना इतिहास बना रही है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में दावा किया कि भाजपा सिर्फ मंदिरों को ढहा नहीं रही है, बल्कि इन्हें ठेके पर देकर लाभ कमाने की प्रक्रिया में लगी है। उन्होंने कहा कि पहले मंदिर को तोड़ा जाता है, उसके बाद नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के नाम पर ठेका दिया जाता है और लागत बढ़ाकर मुनाफा कमाया जाता है। उनके अनुसार यह न सिर्फ धार्मिक धरोहर का नुकसान है, बल्कि यह लाभ-उन्मुख राजनीति की मिसाल भी है।
यह बयान खासकर काशी (वाराणसी) के मणिकर्णिका घाट और उसके आसपास चल रहे बदलावों तथा पुराने मंदिरों के पुर्नविकास/ध्वंस को लेकर आया है। अखिलेश ने इस मुद्दे को सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जोड़ा है और भाजपा पर सियासी लाभ के लिए विरासत को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा के पक्ष में या विरोध में अन्य नेताओं और समूहों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है। भाजपा के नेताओं ने इस तरह के आरोपों को खारिज किया है और कह रहे हैं कि विकास कार्यों पर राजनीतिक मतभेद नहीं होना चाहिए। इस तरह के आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तीव्र कर दिया है।
ये बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पुराने शहरों के गुरुत्वाकर्षण स्थल, विशेषकर वाराणसी जैसे धार्मिक शहरों में विकास व सौंदर्यकरण के नाम पर कई पुरातन संरचनाओं तथा मंदिरों पर विवाद चल रहा है। भाजपा के शासनकाल में ‘बुलडोजर कार्रवाई’ जैसे उपायों को राजनीतिक रूप से भी खूब उठाया गया है, जिसे विपक्षी दल अक्सर आलोचना का विषय बनाते हैं।






