आकाश-NG का सफल परीक्षण, भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस क्षमता की बड़ी मजबूती
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अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद लक्ष्यों पर सटीक वार, पूरी तरह देशी तकनीक से विकसित
संवाद 24 डेस्क: भारत ने अपनी वायु सुरक्षा को और मजबूत करते हुए आकाश नेक्स्ट जेनरेशन (आकाश-NG) मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। भारतीय सेना द्वारा मंगलवार को किए गए इस ट्रायल में मिसाइल सिस्टम ने सभी निर्धारित सर्विस क्वालिटी मानकों (PSQR) को सफलतापूर्वक पूरा किया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह परीक्षण भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस ताकत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के मुताबिक, परीक्षण के दौरान आकाश-NG ने अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद हवाई लक्ष्यों को सटीकता के साथ नष्ट किया। इसमें सीमा क्षेत्र के पास कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्य और लंबी दूरी पर अधिक ऊंचाई पर मौजूद लक्ष्य दोनों शामिल थे। इससे सिस्टम की बहु-स्तरीय क्षमता का सफल प्रदर्शन हुआ।
आकाश-NG मिसाइल सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इसमें देश में विकसित RF सीकर और सॉलिड रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है। यह प्रणाली तेज रफ्तार हवाई खतरों, जैसे फाइटर जेट, ड्रोन और अन्य हवाई प्लेटफॉर्म से निपटने में प्रभावी मानी जा रही है।
क्यों अहम है आकाश-NG
अधिकारियों के अनुसार, आकाश-NG एक आधुनिक और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे DRDO ने डिजाइन और विकसित किया है, जबकि इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया गया है। यह सिस्टम एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को ट्रैक करने और उन्हें मार गिराने में सक्षम है।
आकाश-NG की मारक क्षमता लगभग 30 किलोमीटर तक है और यह करीब 18 किलोमीटर की ऊंचाई तक दुश्मन के हवाई खतरों को निष्क्रिय कर सकता है। इसके सफल परीक्षण के बाद इसे भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना में शामिल करने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। इसके शामिल होने से देश की वायु सुरक्षा प्रणाली और अधिक सशक्त होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले 17 जुलाई को भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ‘आकाश प्राइम’ का भी सफल परीक्षण किया था। उस परीक्षण में 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ रहे दो ड्रोन को मार गिराया गया था। आकाश प्राइम को विशेष रूप से अधिक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है।
आकाश-NG के सफल ट्रायल को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है, जिससे भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक पर भरोसा और बढ़ा है।






