
संवाद 24 नई दिल्ली। पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। हिमालय की गोद में बसे इस देश में नेपाल को पुनः औपचारिक रूप से ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने की मांग तेजी से जोर पकड़ने लगी है। शुरुआत में पहाड़ी इलाकों तक सीमित रहने वाला यह जनआंदोलन अब मधेश और भारत से सटे तराई क्षेत्रों तक फैल चुका है। नेपाल में उपजे इस असंतोष और सुरक्षा स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत सरकार और गृह मंत्रालय भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से सटे भारत-नेपाल के व्यापक सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हिंसा की घटना ने दिया आंदोलन को तूल
नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र में 26 जुलाई को एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच अचानक भड़की सांप्रदायिक झड़प ने मामले को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया। इस हिंसक टकराव में तीन प्रदर्शनकारियों की दुखद मौत हो गई, जिसके बाद पूरे नेपाल में जन आक्रोश की लहर दौड़ गई। यद्यपि नेपाल सरकार के गृह मंत्री ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख नेपाली रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।
15 प्रमुख हिंदूवादी संगठन एक मंच पर आए
नेपाल को पुनः हिंदू पहचान दिलाने के लिए लगभग 15 बड़े धार्मिक और राजनीतिक संगठन एकजुट हो चुके हैं। इनमें संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP), महाकाल युवा शक्ति और हिंदू युवा संघ जैसे प्रभावशाली संगठन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी संगठनों ने 13 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया है और साझा रणनीति के तहत पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन, जनसंपर्क अभियान और प्रशासनिक ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नेपाल के रुपनदेही, नवलपरासी, कपिलवस्तु और जनकपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों में इस आंदोलन का सबसे व्यापक असर देखा जा रहा है। आंदोलकारी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई अब किसी एक शहर या जिले की नहीं, बल्कि पूरे नेपाल के अस्तित्व और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी राष्ट्रीय क्रांति बन चुकी है।
यूपी से लेकर बंगाल तक सीमा पर चौकसी कड़ी
नेपाल में पल-पल बदलते हालात को देखते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) और राज्य पुलिस बलों को सीमा पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने का निर्देश दिया गया है। SSB के महानिरीक्षक (IG) वंदन सक्सेना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रूप से कड़ी कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश: पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज जिलों में विशेष निगरानी बरती जा रही है। महराजगंज के सोनौली तथा सिद्धार्थनगर के बढ़नी, ककरहवा और खुनुवा बार्डर से गुजरने वाले हर यात्री की सघन तलाशी ली जा रही है। पूर्व में यूपी सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में चलाए गए सत्यापन अभियान के तहत कई अवैध निर्माणों को चिह्नित कर हटाया भी गया था।
बिहार: मधुबनी जिले के बेतौंहा और पिपरौन सीमा पर पार करने वालों के लिए बायोमीट्रिक जांच, फेस स्कैनिंग और मूल पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। अररिया और अन्य सीमावर्ती जिलों में SSB और स्थानीय पुलिस द्वारा लगातार फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है।
पश्चिम बंगाल व सिक्किम: सिलीगुड़ी के पास पानीटंकी, मिरिक के पशुपति क्षेत्र तथा सिक्किम से लगने वाली सीमाओं पर अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को तैनात किया गया है। बिना वैध नागरिकता प्रमाण पत्र और गहन जांच के किसी भी व्यक्ति या वाहन को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
नेपाल में सुलग रही इस वैचारिक और सामाजिक चिंगारी के कारण संपूर्ण दक्षिण एशियाई क्षेत्र की निगाहें अब काठमांडू के अगले राजनीतिक कदमों पर टिकी हुई हैं।






