
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया के शक्ति संतुलन और शांति प्रयासों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी के एक सनसनीखेज खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भूचाल ला दिया है। केरी का दावा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ जिस खतरनाक सैन्य हमले की योजना तैयार की थी, उसे पिछले तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल इसे सुना, बल्कि इस पर अपनी सहमति की मुहर भी लगा दी।
तीन राष्ट्रपतियों का इनकार और सुरक्षा चिंताएं
जॉन केरी के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू वर्षों से अमेरिका पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और यहाँ तक कि जो बाइडन के सामने भी ईरान पर हमले का विस्तृत प्रस्ताव रखा था। इन तीनों राष्ट्रपतियों का मानना था कि ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने से न केवल मध्य पूर्व (Middle East) बल्कि पूरी दुनिया में भारी तबाही मच सकती है। इन नेताओं ने कूटनीतिक रास्तों और प्रतिबंधों को प्राथमिकता दी थी, क्योंकि उन्हें डर था कि एक सीधा हमला परमाणु युद्ध या वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बन सकता है।
ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न और नेतन्याहू की ‘पिच’
हालांकि, सत्ता परिवर्तन के साथ ही समीकरण पूरी तरह बदल गए। केरी ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनते ही नेतन्याहू को वह समर्थन मिल गया जिसकी वे लंबे समय से तलाश कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप के सामने एक ‘फोर-पॉइंट पिच’ रखी थी, जिसमें दावा किया गया था कि एक सटीक सैन्य हमले से ईरान के नेतृत्व को खत्म किया जा सकता है, वहां तख्तापलट कराया जा सकता है और ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है। ट्रंप, जो पहले से ही ईरान के प्रति सख्त रुख रखते थे, इस योजना से सहमत हो गए।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और भीषण रक्तपात
इस सहमति का नतीजा ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के रूप में सामने आया, जिसके तहत अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर घातक हमले किए। इस युद्ध के परिणामस्वरूप ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का केंद्र ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) बंद हो गया है।
इतिहास की चेतावनी और भविष्य का संकट
जॉन केरी ने वियतनाम और इराक युद्ध की याद दिलाते हुए चेतावनी दी है कि जनता से झूठ बोलकर युद्ध में झोंकना आत्मघाती होता है। उन्होंने कहा, “हमें बताया गया था कि यह युद्ध शासन परिवर्तन और शांति के लिए है, लेकिन हकीकत में यह केवल विनाश लाया है।” फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अब ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि एक तरफ शांति वार्ता की बातें हो रही हैं और दूसरी तरफ युद्ध की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही है। क्या यह नेतन्याहू और ट्रंप की जुगलबंदी दुनिया को एक अंतहीन संघर्ष की ओर ले जा रही है? यह सवाल आज हर वैश्विक मंच पर गूंज रहा है।





