धमाकों की गूँज खाड़ी से तेहरान तक: क्या एक वैश्विक संघर्ष में बदल रहा है मध्य-पूर्व
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संवाद 24 नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में तनाव का तूफ़ान थमने का नाम नहीं ले रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान द्वारा शुरू किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण खाड़ी के कई प्रमुख शहरों में तेज धमाकों की आवाज़ें सुनाई दीं, जिनमें दुबई और कतर की राजधानी दोहा शामिल हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह संकट अब पहले से कहीं अधिक व्यापक और घातक रूप ले रहा है, जिससे दुनिया भर में राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संकट फैल रहा है। रविवार और मंगलवार की रात को दुबई तथा दोहा में एक के बाद एक जोरदार धमाकों और रक्षा प्रणालियों के इंटरसेप्शन की आवाज़ें स्थानीय निवासियों और आगंतुकों ने सुनीं, जिससे वहाँ रहने वाले लोगों में भय और अशांति की लहर दौड़ गई। दुबई में कई क्षेत्रों में मिसाइल इंटरसेप्शन के मलबे के कारण आग और हल्की–फुल्की तोड़फोड़ भी देखने को मिली है।
खाड़ी शहरों में भीषण असर
दुबई और अबू धाबी में मिसाइलों और ड्रोन हमलों के चलते एयरस्पेस बंद कर दिया गया है, जिसके कारण हजारों यात्रियों की उड़ानें रद्द या स्थगित हो चुकी हैं। कतर की राजधानी दोहा में भी आकाश में मिसाइल इंटरसेप्शन और धमाकों का सिलसिला जारी रहा। बहरैन और कुवैत जैसे देशों में भी धमाके सुने गए और नागरिकों के लिए भयावह माहौल उत्पन्न हो गया है। इस संकटनाक स्थिति का सबसे बड़ा कारण ईरान और इज़राइल तथा अमेरिका के बीच व्यापक सैन्य संघर्ष है। इज़राइल ने तेहरान में भारी हवाई हमले किए हैं, जिनमें मिसाइल और रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिससे ईरानी पक्ष ने कड़े जवाबी हमले शुरू किए। यह टकराव उस समय और बढ़ गया जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर आई और दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमले तथा मिसाइलों की मारक क्षमता में इज़ाफा हुआ।
यूएई की छवि को लगा झटका
दुबई और अबू धाबी जैसी जगहों को आमतौर पर सुरक्षित और स्थिर माना जाता था, लेकिन इन हमलों ने उस प्रतिष्ठा को भी हिलाकर रख दिया है। दुबई में बुर्ज अल अरब, पाम जुमेराह और अन्य प्रमुख जगहों के आस-पास विस्फोटों और इंटरसेप्शन के मलबों से नुकसान भी हुआ है। यूएई सरकार ने कहा है कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को नष्ट किया, लेकिन गिरते मलबे से कुछ इमारतों तथा नागरिक ढांचों को नुकसान पहुँचा।
आकाशीय यातायात अस्त-व्यस्त
दुबई और आसपास के एयरपोर्ट्स से सभी उड़ानें निरस्त की गई हैं। यात्रियों सहित लाखों लोग फ़ंस गए हैं, जिनमें कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास तेज कर दिए हैं, जबकि एयरलाइन कंपनियों को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ रही है।
आर्थिक प्रभाव
इस सैन्य टकराव से वैश्विक तेल बाजार और वित्तीय अस्थिरता पर भी गहरा असर पड़ा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, पर तनाव के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अगर संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो आर्थिक प्रभाव और भी गंभीर हो सकता है।
नागरिका जीवन अस्त-व्यस्त
दुबई, दोहा और अन्य शहरों में रहने वाले लोगों की रोज़मर्रा गतिविधियाँ भी प्रभावित हैं। धुएँ, धमाकों की आवाज़ और हवाई जहाज़ों के निलंबन के कारण सामान्य जीवन अस्थिर हो गया है। स्थानीय प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई लोग भय, शंका और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
वैश्विक प्रतिक्रिया और कूटनीति
यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं रहा; विश्व के कई देशों ने बयान जारी किये हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है, ताकि संघर्ष को रोकने और मानवीय संकट को कम करने के उपाय किये जा सकें।






