इजराइल के साथ ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक’ युग का आगाज: पीएम मोदी का ऐतिहासिक दौरा और भारत का नया ग्लोबल प्लान

Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय कूटनीति के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा पर इजराइल पहुंच रहे हैं, जिसे न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि वैश्विक सुरक्षा समीकरणों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 25 फरवरी से शुरू होने वाला यह दौरा भारत और इजराइल के रिश्तों को ‘स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ से ऊपर उठाकर ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक रिलेशंस’ के स्तर पर ले जाने वाला है। गौरतलब है कि इजराइल यह दर्जा केवल अमेरिका और जर्मनी जैसे अपने सबसे करीबी सहयोगियों को ही देता है।

कूटनीतिक शिखर और द्विपक्षीय वार्ता का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी न केवल इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ गहन द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, बल्कि वह इजराइल की संसद ‘नेसेट’ (Knesset) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी बनेंगे। नेतन्याहू ने पीएम मोदी को अपना “घनिष्ठ मित्र” बताते हुए इस यात्रा को मील का पत्थर करार दिया है। भारत और इजराइल के बीच यह व्यक्तिगत रसायन विज्ञान रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नए द्वार खोलने वाला साबित होगा।

रणनीतिक सुरक्षा और अत्याधुनिक सैन्य ढांचा
इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण रक्षा क्षेत्र में होने वाले बड़े समझौते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारत और इजराइल रक्षा सहयोग के लिए एक नए ‘वर्गीकृत ढांचे’ (Classified Framework) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके तहत इजराइल भारत को अपनी उन अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों तक पहुंच प्रदान करेगा, जो अब तक प्रतिबंधित श्रेणियों में थीं। इसमें उन्नत वायु रक्षा प्रणाली (Advanced Air Defense Systems) और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा उद्योग में संयुक्त विकास शामिल है। यह सहयोग भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को रक्षा विनिर्माण में एक वैश्विक हब बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है।

सुदर्शन चक्र और ‘हेक्सागोनल एलायंस’ का विजन
चर्चा है कि भारत अपने स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा कवच को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए इजराइल के प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) की तकनीकों को शामिल करने पर विचार कर सकता है। बेंजामिन नेतन्याहू ने एक “हेक्सागोनल एलायंस” (छह देशों का गठबंधन) का विजन भी पेश किया है, जिसमें भारत को एक प्रमुख शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। यह गठबंधन क्षेत्रीय स्थिरता और कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार करने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है, जिससे एशिया और मध्य पूर्व के सुरक्षा समीकरण बदल जाएंगे।

भविष्य की तकनीक और डिजिटल क्रांति का संगम
रक्षा के इतर, यह यात्रा भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित रहने वाली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर मुहर लगेगी। भारत की स्केलिंग क्षमता और इजराइल की नवाचार शक्ति मिलकर वैश्विक बाजार में एक नया नेतृत्व प्रदान करने की तैयारी में हैं। दोनों देश एक साझा ‘टेक-फंड’ बनाने पर भी विचार कर रहे हैं, जो स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।

आर्थिक गठबंधन और मुक्त व्यापार की राह
व्यापारिक मोर्चे पर, दोनों देश एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की ओर ठोस कदम बढ़ा रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में जबरदस्त विविधता आई है। जहां पहले यह केवल हीरा व्यापार तक सीमित था, वहीं अब इसमें पेट्रोलियम उत्पाद, कृषि तकनीक, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ी है। पीएम मोदी इस दौरान इजराइल के शीर्ष सीईओ के साथ एक ‘राउंड टेबल’ बैठक करेंगे, जिसका उद्देश्य भारत में इजराइली निवेश को दोगुना करना है।

सांस्कृतिक जुड़ाव और प्रवासी भारतीयों की भूमिका
अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ‘याद वाशम’ (Yad Vashem) होलोकॉस्ट मेमोरियल का दौरा करेंगे, जहां वह नाजी नरसंहार के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देंगे। यह भारत की ओर से मानवीय संवेदनाओं और शांति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। इसके अलावा, वह इजराइल में बसे भारतीय मूल के लोगों (Indian Diaspora) के एक विशाल समुदाय को भी संबोधित करेंगे। ये प्रवासी न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी दोनों देशों के बीच एक ‘लिविंग ब्रिज’ की तरह काम करते हैं, जो आपसी विश्वास की नींव को मजबूत बनाते हैं।

वैश्विक संदेश और भारत की उभरती महाशक्ति छवि
इस दौरे को लेकर वैश्विक मंच पर भी सरगर्मी तेज है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि भारत के राष्ट्रीय हित और सुरक्षा प्राथमिकताएं किसी भी वैश्विक परिस्थिति में सर्वोपरि हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा केवल दो देशों की मुलाकात नहीं, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं का आधुनिक विज्ञान और साझा भविष्य के लिए एकजुट होना है। आने वाले दिनों में तेल अवीव से निकलने वाले संदेश दुनिया को भारत की नई ‘ग्लोबल पावर’ वाली छवि का अहसास कराएंगे, जो अपने हितों के लिए स्वतंत्र और साहसिक निर्णय लेने में सक्षम है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News