
संवाद 24 डेस्क। क्या आपने कभी गौर किया है कि एक ही कमरे में बैठे लोगों में से किसी एक को मच्छर ज्यादा काटते हैं, जबकि दूसरे को कम? यह अनुभव केवल संयोग नहीं है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मच्छर मनुष्यों को समान रूप से आकर्षक नहीं मानते। शरीर की गंध, त्वचा पर मौजूद रासायनिक पदार्थ, सांस से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और शरीर की गर्मी जैसे संकेत उनके मेजबान चुनने में भूमिका निभाते हैं। हालिया शोध ने इस सवाल को और गहराई से समझने की कोशिश की है कि आखिर कुछ लोग मच्छरों के लिए दूसरों की तुलना में अधिक आकर्षक क्यों होते हैं।
मच्छरों का निशाना बनने के पीछे क्या है शरीर की गंध का विज्ञान?
मच्छरों की कई प्रजातियां मनुष्यों की ओर आकर्षित होती हैं, लेकिन उनके आकर्षण का आधार केवल खून नहीं है। मादा मच्छर अंडे विकसित करने के लिए रक्त का सेवन करती हैं और मेजबान की तलाश में कई संवेदी संकेतों का उपयोग करती हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, शरीर की गंध इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। त्वचा पर रहने वाले सूक्ष्मजीव पसीने और त्वचा से निकलने वाले पदार्थों को बदलकर ऐसी गंध पैदा करते हैं, जिन्हें मच्छर पहचान सकते हैं।
यही कारण है कि दो लोगों के पास बैठने पर भी मच्छर एक व्यक्ति की ओर अधिक आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की स्वच्छता खराब है। शरीर की गंध कई जैविक कारकों से प्रभावित होती है और केवल पसीने की मात्रा से इसका पूरा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
कार्बन डाइऑक्साइड और शरीर की गर्मी कैसे करती है मच्छरों को आकर्षित?
जब मनुष्य सांस छोड़ता है, तो उसमें कार्बन डाइऑक्साइड होती है। मच्छर इस गैस को पहचान सकते हैं और यह उन्हें संभावित मेजबान की दिशा में बढ़ने में मदद करती है। शोध के अनुसार, कार्बन डाइऑक्साइड मच्छरों की अन्य संकेतों के प्रति प्रतिक्रिया को भी सक्रिय कर सकती है। इसके बाद शरीर की गर्मी, गंध और दृश्य संकेत उन्हें मेजबान तक पहुंचने में सहायता करते हैं।
इस प्रक्रिया को केवल एक संकेत से समझना सही नहीं होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, मच्छर कई संकेतों को एक साथ मिलाकर निर्णय लेते हैं। यही वजह है कि किसी व्यक्ति के पास मच्छर का आना केवल उसके शरीर की गर्मी या केवल उसकी सांस से जुड़ा हुआ नहीं माना जा सकता।
क्या कुछ लोगों की त्वचा में मौजूद रसायन मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करते हैं?
वैज्ञानिक शोध में त्वचा से निकलने वाले कुछ रासायनिक पदार्थों और मच्छरों के आकर्षण के बीच संबंध पाया गया है। एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ लोगों की त्वचा से निकलने वाले कार्बोक्सिलिक एसिड जैसे पदार्थों का स्तर अधिक था और ऐसे लोग मच्छरों के लिए अधिक आकर्षक पाए गए। इस अध्ययन ने यह भी संकेत दिया कि शरीर की गंध में मौजूद रसायनों का मिश्रण मच्छरों की पसंद को प्रभावित कर सकता है।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी एक रसायन को सभी लोगों में मच्छरों के आकर्षण का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिकों के अनुसार, गंध का पूरा मिश्रण, त्वचा के सूक्ष्मजीव और अन्य जैविक संकेत मिलकर प्रभाव डालते हैं। इसलिए यह कहना कि केवल किसी एक पदार्थ की वजह से मच्छर किसी व्यक्ति को ज्यादा काटते हैं, अधूरा निष्कर्ष होगा।
हालिया शोध ने क्या नया बताया?
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 42 प्रतिभागियों की शरीर की गंध का विश्लेषण किया और एडीज एजिप्टी मच्छरों के आकर्षण का परीक्षण किया। अध्ययन में 27 वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों की पहचान की गई, जो अलग-अलग लोगों की गंध में अंतर से जुड़े थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि गंध के मिश्रण का अनुपात मच्छरों की पसंद को प्रभावित कर सकता है। अध्ययन में गर्भावस्था या मासिक चक्र के चरण जैसे कारकों का भी आकर्षण के स्तर से संबंध पाया गया।
हालांकि, इस तरह के अध्ययन का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति में मच्छरों का व्यवहार एक जैसा होगा। मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां अलग-अलग संकेतों पर प्रतिक्रिया कर सकती हैं। 2026 के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि एडीज एजिप्टी, एडीज एल्बोपिक्टस और क्यूलेक्स क्विनक्वेफासियाटस जैसी प्रजातियां मनुष्यों की ओर आकर्षण के मामले में अलग-अलग प्राथमिकताएं दिखा सकती हैं।
क्या खून का समूह भी मच्छरों के काटने को प्रभावित करता है?
खून के समूह और मच्छरों के आकर्षण के बीच संबंध को लेकर कई चर्चाएं होती हैं। कुछ अध्ययनों में इस विषय पर अंतर पाया गया है, लेकिन खून का समूह अकेला ऐसा कारक नहीं है, जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि किसी व्यक्ति को मच्छर ज्यादा काटेंगे या कम। शरीर की गंध, कार्बन डाइऑक्साइड, गर्मी और अन्य संकेत भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के मच्छरों का अधिक शिकार होने को केवल ब्लड ग्रुप से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त नहीं होगा।
क्या कपड़ों का रंग भी मच्छरों के आकर्षण को प्रभावित करता है?
मच्छरों की दृष्टि भी उनके मेजबान खोजने की प्रक्रिया में भूमिका निभाती है। शोध में पाया गया है कि कार्बन डाइऑक्साइड की मौजूदगी में मच्छरों की कुछ प्रजातियां मानव त्वचा से संबंधित लाल और नारंगी जैसे दृश्य संकेतों की ओर अधिक आकर्षित हो सकती हैं। हालांकि, यह प्रभाव गंध और अन्य संकेतों के साथ मिलकर काम करता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल कपड़ों का रंग बदल लेने से मच्छरों से पूरी तरह बचा जा सकता है। मच्छरों का व्यवहार कई संकेतों पर निर्भर करता है और अलग-अलग प्रजातियों में इसका प्रभाव अलग हो सकता है।
क्या ज्यादा मच्छर काटने का मतलब बीमारी का खतरा भी ज्यादा है?
मच्छरों के काटने की संख्या और मच्छरजनित बीमारी के जोखिम को एक ही बात नहीं माना जाना चाहिए। बीमारी का खतरा इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित मच्छर संक्रमित है या नहीं, वह किस प्रजाति का है और उस क्षेत्र में कौन-सी बीमारी फैल रही है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां अलग-अलग मच्छर प्रजातियों और रोगजनकों से जुड़ी हैं।
इसलिए यदि किसी व्यक्ति को मच्छर अधिक काटते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह निश्चित रूप से किसी बीमारी से संक्रमित होगा। फिर भी मच्छरों से बचाव करना जरूरी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मच्छरजनित रोगों का खतरा मौजूद हो।
मच्छरों से बचाव के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
मच्छरों से बचाव के लिए घर में पानी जमा न होने देना, खिड़कियों पर जाली लगाना, मच्छरदानी का उपयोग करना और जरूरत के अनुसार प्रभावी रिपेलेंट का इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है। बाहर जाते समय शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी मददगार हो सकता है। मच्छरों की संख्या कम करने के लिए आसपास की सफाई और पानी के ठहराव को रोकना भी महत्वपूर्ण है।
यदि किसी व्यक्ति को बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, उल्टी या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें केवल मच्छर के काटने से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
मच्छर किसी एक वजह से नहीं, कई संकेतों के आधार पर चुनते हैं अपना मेजबान
वैज्ञानिक शोध से यह स्पष्ट होता है कि मच्छर कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में अधिक आकर्षक मान सकते हैं। शरीर की गंध, त्वचा के रासायनिक पदार्थ, कार्बन डाइऑक्साइड, गर्मी और दृश्य संकेत इस प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं। हालिया शोध ने यह भी दिखाया है कि अलग-अलग मच्छर प्रजातियों की पसंद अलग हो सकती है और शरीर की गंध का मिश्रण उनके व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए मच्छरों के काटने को केवल किसी एक आदत, खून के समूह या स्वच्छता से जोड़ना सही नहीं होगा। विज्ञान का संदेश यही है कि मच्छरों का व्यवहार जटिल है और उनसे बचाव के लिए व्यक्तिगत सावधानियों के साथ पर्यावरणीय नियंत्रण भी जरूरी है।






