कुढ़िना की सड़क बनी ग्रामीणों की मुसीबत, गड्ढों और पत्थरों के बीच गुजर रहा रोजमर्रा का सफर

कन्नौज। उमर्दा विकासखंड की ग्राम पंचायत कुढ़िना में नहर की पटरी से गांव की ओर आने वाला मुख्य संपर्क मार्ग लंबे समय से बदहाल है। सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि ग्रामीणों और राहगीरों को आवागमन में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

डामर गायब, जगह-जगह उभरे गड्ढे और नुकीले पत्थर

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क से डामर की परत लगभग पूरी तरह गायब हो चुकी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे और नुकीले कंकड़-पत्थर निकल आए हैं। बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भरने से रास्ता कीचड़युक्त हो जाता है, जिससे पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए आवागमन और अधिक कठिन हो जाता है।कुढ़िना गांव का प्रशासनिक रिकॉर्ड और विभिन्न सरकारी एवं स्थानीय स्रोतों में उल्लेख मिलता है। हालिया स्थानीय समाचार रिपोर्टों में भी गांव का संबंध उमर्दा विकासखंड से बताया गया है।

बाइक सवारों के लिए बढ़ा खतरा, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को भी परेशानी

स्थानीय निवासी रामू, मोहन, शैलेश और शरद कुमार ने सड़क की स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि खराब मार्ग के कारण रोजाना आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती है। स्थानीय महिला जगितो देवी के अनुसार, सड़क पर मौजूद गड्ढों और नुकीले पत्थरों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के गिरने की घटनाएं भी होती रहती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और पैदल राहगीरों के लिए यह रास्ता विशेष रूप से परेशानी का कारण बना हुआ है।

ग्रामीणों की समस्या कब होगी दूर? बजट का इंतजार

ग्राम पंचायत कुढ़िना के प्रधान लाल सिंह यादव ने सड़क निर्माण को लेकर बताया कि फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से नया बजट स्वीकृत होते ही सड़क निर्माण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा।

वर्षों की परेशानी के बाद ग्रामीणों को इंतजार

ग्रामीणों की मुख्य मांग सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की है। उनका कहना है कि यह मार्ग गांव के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे लंबे समय तक बदहाल स्थिति में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। अब देखना यह है कि बजट स्वीकृति के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया कब शुरू होती है और ग्रामीणों को वर्षों पुरानी समस्या से कब राहत मिलती है।

Shivpratap Singh
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