
कन्नौज। सड़क किनारे उगी झाड़ियां और बबूल के पेड़ अब राहगीरों के लिए परेशानी ही नहीं, बल्कि जानलेवा खतरे का कारण बनते नजर आ रहे हैं। ऊसराहार लोहिया पथ पर मिर्जापुर गांव के पास सड़क के किनारे फैली वनस्पति के कारण मार्ग का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित है। इसी क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में दो बाइक सवार युवकों की मौत के बाद सड़क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
ड्यूटी से लौट रहे थे युवक, बस से टकराई बाइक
जानकारी के अनुसार, सकरावा थाना क्षेत्र के परौर गांव निवासी दो युवक इटावा से ड्यूटी करके बाइक से घर लौट रहे थे। मिर्जापुर गांव के पास उनकी बाइक रोडवेज बस से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवारों में कोहराम मच गया।
झाड़ियों ने सड़क को किया संकरा, मोड़ों पर भी दृश्यता प्रभावित
स्थानीय राहगीरों और वाहन चालकों का कहना है कि ऊसराहार लोहिया पथ पर कई स्थानों पर बबूल के पेड़ और झाड़ियां सड़क की ओर काफी दूर तक फैल गई हैं। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो रही है। खासकर मोड़ों पर सामने से आने वाले वाहन दिखाई देने में भी परेशानी होने की बात कही जा रही है।
सिर्फ एक सड़क नहीं, कई मार्गों पर यही समस्या
स्थानीय लोगों के मुताबिक, समस्या केवल ऊसराहार लोहिया पथ तक सीमित नहीं है। सौरिख-विधूना और सौरिख-छिबरामऊ मार्ग के कई हिस्सों में भी सड़क के दोनों ओर उगी घास, झाड़ियां और बबूल के पेड़ सड़क की ओर फैल गए हैं। इससे वाहन चालकों को किनारे से निकलने में परेशानी होती है और सामने से आने वाले वाहनों को लेकर जोखिम बढ़ जाता है।कन्नौज जिले में सड़कों की स्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। जून 2026 में छिबरामऊ-सौरिख मार्ग के ईशन नदी पुल के पास बड़े गड्ढों और क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सुरक्षा संबंधी चिंता जताई थी।
लोगों ने पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
राहगीरों का आरोप है कि सड़क किनारे पेड़ों और झाड़ियों की नियमित कटाई-सफाई नहीं होने के कारण समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के साथ-साथ उसके किनारों की सफाई और पेड़ों की छंटाई भी यातायात सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे का खतरा बना रह सकता है।
पहले था लेबर गैंग, अब व्यवस्था नहीं
मामले में लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड के सहायक अभियंता श्रीकृष्ण वर्मा ने बताया कि पहले विभाग में लेबर गैंग हुआ करती थी, जो सड़कों और उनकी पटरियों की देखरेख करती थी। वर्तमान में ऐसी व्यवस्था नहीं है। उन्होंने सड़क तक फैले पेड़ों को जल्द हटवाने का आश्वासन दिया है।
हादसे के बाद फिर सामने आया सड़क सुरक्षा का सवाल
दो युवकों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सड़क किनारे फैली झाड़ियों और पेड़ों की समय पर छंटाई कराई जाती तो हादसे का खतरा कम हो सकता था। हालांकि, मौजूदा हादसे का सटीक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन घटना ने सड़क की नियमित सफाई, दृश्यता और यातायात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।






