बारिश की रात बनी काल! कच्चे मकान की छत भरभराकर गिरी, मलबे में दबकर अधेड़ की दर्दनाक मौत

तालग्राम/कन्नौज। कन्नौज जिले के तालग्राम क्षेत्र में भारी बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया। माधौनगर गांव में सोमवार रात कच्चे मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय मकान के अंदर सो रहे करीब 40 वर्षीय राम सिंह पटेल पुत्र रघुवर मलबे में दब गए। परिजनों ने जब तक मलबा हटाकर उन्हें बाहर निकाला, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

तेज बारिश के बीच अचानक ढह गई छत

बताया गया कि राम सिंह पटेल गांव में अपने कच्चे मकान में रहते थे। सोमवार रात बारिश के दौरान वह मकान के अंदर सो रहे थे। इसी दौरान कमजोर और जर्जर छत अचानक ढह गई और वह उसके मलबे में दब गए। हादसे की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव करते हुए मलबा हटाया, लेकिन राम सिंह को बचाया नहीं जा सका।माधौनगर तालग्राम क्षेत्र का गांव है। पूर्व में भी स्थानीय रिपोर्टों में बारिश के दौरान गांव में जलभराव और खराब सफाई व्यवस्था की समस्या सामने आ चुकी है।

पक्के आवास के लिए किया था आवेदन, पर नहीं मिला लाभ

मृतक के चाचा अमित पटेल ने आरोप लगाया कि राम सिंह ने पक्के मकान के लिए आवास योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका। परिवार के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों के कारण वह जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पक्के आवास की सुविधा मिल जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था।हालांकि, आवास योजना के आवेदन और पात्रता संबंधी दावे की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।

माता-पिता की मौत के बाद चाचा के साथ रहते थे

परिजनों के मुताबिक राम सिंह अविवाहित थे। माता-पिता के निधन के बाद वह अपने चाचा अमित पटेल के साथ रहते थे। हादसे के बाद परिवार में मातम छा गया। मंगलवार को परिजनों ने गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया।

पुलिस को घटना की सूचना नहीं, जांच में जुटी पुलिस

तालग्राम थाना प्रभारी निरीक्षक रंजना पांडेय के अनुसार, घटना की सूचना थाने में अभी तक नहीं दी गई थी। पुलिस मामले की जानकारी जुटाकर आवश्यक जांच कर रही है।घटना ने बारिश के मौसम में जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर आवासीय ढांचों की पहचान और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी आवास योजनाओं का लाभ पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Shivpratap Singh
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