
सावन के दूसरे सोमवार को तिर्वा में आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सिद्धपीठ बाबा दौलेश्वर महादेव की भव्य शाही पालकी यात्रा सोमवार दोपहर करीब 2 बजे मंदिर परिसर से निकाली गई। बाबा की पालकी को कंधा देने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया। यात्रा में प्रदेश सरकार के ऊर्जा राज्यमंत्री एवं तिर्वा विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने भी पालकी को कंधा देकर श्रद्धा व्यक्त की।
पालकी थामने के लिए भक्तों में दिखा उत्साह
दौलेश्वर धाम मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बाबा की शाही सवारी का शुभारंभ हुआ। पालकी को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, बाबा की पालकी को अपने कंधों पर उठाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। सिद्धपीठ दौलेश्वर धाम में सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा रही है।
इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी शाही सवारी
शाही पालकी यात्रा तिर्वा-ठठिया मार्ग से होते हुए कन्नौज-औरैया रोड पर पहुंची। इसके बाद यात्रा ब्लॉक मुख्यालय के सामने से क्रांति चौराहा, रोडवेज बस स्टैंड और गांधी चौक होते हुए खैरनगर रोड स्थित काली मंदिर तक पहुंची, जहां यात्रा का समापन किया गया।
राज्यमंत्री समेत कई लोगों ने उठाई पालकी
यात्रा में ऊर्जा राज्यमंत्री कैलाश सिंह राजपूत के अलावा नगर पंचायत तिर्वागंज के चेयरमैन प्रतिनिधि सौरव गुप्ता, पूर्व चेयरमैन विनोद गुप्ता, प्रभात उर्फ लालू वर्मा, अभिषेक उर्फ रिंकू तिवारी, कुक्कू चौहान और आयुष गुप्ता समेत कई लोगों ने बाबा की पालकी को कंधा दिया।
ढोल-नगाड़ों के बीच झूमते नजर आए श्रद्धालु
शाही सवारी के दौरान सबसे आगे हाथों में ध्वज लिए युवाओं की टोली चल रही थी। इसके पीछे बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु भक्ति में झूमते हुए यात्रा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और धार्मिक जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रही पुलिस
यात्रा को देखते हुए तिर्वा कोतवाली प्रभारी संजय शुक्ला पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहे। भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मियों ने प्रमुख स्थानों पर निगरानी की। वहीं नगर पंचायत की ओर से यात्रा मार्ग की साफ-सफाई भी कराई गई।
सिद्धपीठ दौलेश्वर धाम में सावन भर उमड़ती है आस्था
तिर्वा का बाबा दौलेश्वर धाम क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में माना जाता है। उपलब्ध पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िए पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजनों और श्रृंगार के अवसर पर भी श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटती रही है।






