
कन्नौज जनपद के उमर्दा विकासखंड में ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से निर्मित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) निष्क्रिय पड़े हैं। कई ग्राम पंचायतों में इन केंद्रों पर लंबे समय से ताले लटके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर इनका उपयोग कचरा प्रबंधन के बजाय भूसा, कंडा और लकड़ी रखने के लिए किया जा रहा है। इससे स्वच्छ भारत मिशन और ओडीएफ प्लस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दर्जनों ग्राम पंचायतों में नहीं हो रहा RRC सेंटरों का संचालन
जानकारी के अनुसार, उमरन, तिजलापुर, जनखत, निस्तौली, पैथाना, बेहटा समेत उमर्दा ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में बने RRC सेंटर बंद पड़े हैं। वहीं सिकरोरी ग्राम पंचायत में निर्मित केंद्र में कचरे के बजाय भूसा, कंडा और लकड़ी रखी मिली। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र बनने के बाद से उनका नियमित संचालन शुरू ही नहीं हुआ और अधिकांश लोगों को इनके वास्तविक उद्देश्य की जानकारी भी नहीं है।
वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की योजना ठप
RRC सेंटरों का उद्देश्य गांवों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कर उसका वैज्ञानिक निस्तारण करना है। योजना के तहत गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जानी थी, जबकि प्लास्टिक, कागज और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाना था। इससे गांवों को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था।
गांवों में बढ़ रहे कूड़े के ढेर, ग्रामीणों में नाराजगी
RRC सेंटर बंद रहने के कारण कई गांवों में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर लगने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कचरे के पृथक्करण और निस्तारण की व्यवस्था ही संचालित नहीं होगी, तो स्वच्छता अभियान का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से केंद्रों को शीघ्र चालू कर नियमित संचालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
भुगतान जारी, व्यवस्था ठप होने पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पंचायतों में साफ-सफाई और कूड़ा संग्रहण से जुड़े मदों में व्यय जारी है, लेकिन RRC सेंटरों के बंद रहने से संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। ऐसे में योजना की निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन ने दिए जांच और कार्रवाई के संकेत
खंड विकास अधिकारी सोनिया श्रीवास्तव ने बताया कि बंद पड़े RRC सेंटरों की पहचान कराई जाएगी। जांच के बाद लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा केंद्रों के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।






