
तिर्वा कस्बे में जाम की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से लागू किए गए ‘नो टैंपो जोन’ के आदेश का अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। आदेश लागू होने के महज दो दिन बाद ही टैंपो और ऑटो फिर से कस्बे की प्रमुख सड़कों पर संचालित होते नजर आए, जिससे यातायात व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
जाम से राहत के लिए लिया गया था निर्णय
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए यातायात पुलिस ने तिर्वा कस्बे को ‘नो टैंपो जोन’ घोषित करते हुए निर्देश दिए थे कि टैंपो और ऑटो कस्बे के बाहर निर्धारित स्थानों पर ही खड़े होंगे तथा मुख्य बाजार और चौराहों पर उनका प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। शुरुआत में बैरिकेडिंग कर इस व्यवस्था को लागू भी किया गया था।
मुख्य चौराहों पर फिर लौट आई पुरानी स्थिति
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्तमान में गांधी चौराहा, ठठिया रोड तथा अन्य प्रमुख मार्गों पर फिर से टैंपो सवारियां भरते दिखाई दे रहे हैं। इससे पहले की तरह सड़क पर अव्यवस्था और जाम की स्थिति बनने लगी है। कस्बे में लंबे समय से स्थायी टैंपो स्टैंड का अभाव भी इस समस्या का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
अस्पताल और आम लोगों को होती है परेशानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जाम के कारण कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी प्रभावित होते हैं। बाजार क्षेत्र में अनियंत्रित ढंग से टैंपो खड़े होने से पैदल यात्रियों और अन्य वाहन चालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
यातायात प्रभारी ने कही यह बात
यातायात प्रभारी आफाक खान ने बताया कि तिर्वा को ‘नो टैंपो जोन’ घोषित किया गया है और नियमों के अनुसार टैंपो को कस्बे के बाहर ही खड़ा होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनकी ड्यूटी जनपद से बाहर इटावा में लगी हुई है। ड्यूटी से लौटने के बाद दोबारा अभियान चलाकर टैंपो चालकों को नियमों का पालन कराने की कार्रवाई की जाएगी।






