
कन्नौज जनपद के तिर्वा क्षेत्र स्थित किनौरा गांव के जूनियर विद्यालय की कक्षा 8 की छात्रा वर्षा ने सीमित संसाधनों में एक अनोखा शैक्षिक मॉडल तैयार कर मिसाल पेश की है। राजमिस्त्री की बेटी वर्षा ने कबाड़ में पड़े सामान का उपयोग कर केवल 50 रुपये की लागत से ‘लाइव डिटेक्टिव फॉर्मूला बॉक्स’ बनाया है। यह मॉडल विद्यार्थियों को गणित के प्रश्नों के सही उत्तर की तुरंत जांच करने में मदद करता है और पढ़ाई को अधिक रोचक बनाता है।
कबाड़ के सामान से तैयार हुआ अभिनव प्रोजेक्ट
छात्रा ने इस मॉडल को बनाने के लिए एक खाली जूते का डिब्बा, पुराना मोबाइल चार्जर, एलईडी लाइट, तार, स्क्रू और अन्य कबाड़ सामग्री का उपयोग किया। मॉडल में एक तरफ गणित के प्रश्न और सूत्र, जबकि दूसरी ओर संभावित उत्तर दिए गए हैं। सही उत्तर पर सर्किट पूरा होते ही एलईडी जल उठती है, जबकि गलत उत्तर देने पर लाइट नहीं जलती। इससे विद्यार्थी स्वयं अपने उत्तर की जांच कर सकते हैं।
शिक्षक से मिला विचार, खेल-खेल में सीख रहे छात्र
वर्षा ने बताया कि इस मॉडल को बनाने की प्रेरणा उन्हें विद्यालय के गणित शिक्षक से मिली। इसका उद्देश्य गणित जैसे कठिन विषय को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक बनाना है। विद्यालय में शिक्षक की अनुपस्थिति में भी छात्र इस मॉडल की सहायता से अभ्यास कर सकते हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और विषय के प्रति रुचि बढ़ रही है।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद बेटी ने दिखाई प्रतिभा
वर्षा के पिता सुधीर कुमार राजमिस्त्री हैं और परिवार के साथ किराये के मकान में रहते हैं। उन्होंने बताया कि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण बेटी को निजी विद्यालय में नहीं पढ़ा सके, लेकिन सरकारी विद्यालय में पढ़ते हुए भी वर्षा लगातार नई-नई चीजें बनाने का प्रयास करती रहती है। परिवार को उसकी इस उपलब्धि पर गर्व है।
शिक्षकों ने बताया प्रेरणादायक नवाचार
विद्यालय के शिक्षक वैभव राजपूत ने कहा कि वर्षा का यह मॉडल अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। उनका मानना है कि ऐसे नवाचार बच्चों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता और रचनात्मकता विकसित करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस तरह के प्रयोग विद्यालयों में नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देंगे।






