कन्नौज में गौशालाओं के लिए बड़ा कदम: 109 क्विंटल भूसा भेजा गया
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कन्नौज में गौशालाओं में चारे की कमी को दूर करने के लिए प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने कलेक्ट्रेट परिसर से भूसा लदी गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य जनपद की विभिन्न गौशालाओं में वर्षभर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
विभागों के सहयोग से जुटा 109 क्विंटल भूसा
इस अभियान के तहत कुल 109 क्विंटल भूसा एकत्रित किया गया, जो विभिन्न कृषि एवं सहयोगी विभागों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।उप कृषि निदेशक, भूमि संरक्षण अधिकारी एवं पीसीएफ जिला प्रबंधक द्वारा 10-10 क्विंटल योगदानजिला खाद्य विपणन अधिकारी द्वारा 20 क्विंटलजिला कृषि अधिकारी द्वारा सर्वाधिक 59 क्विंटल भूसा दान किया गया यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय और जिम्मेदारी का प्रभावी निर्वहन किया गया।
गौसंरक्षण को बताया सामाजिक दायित्व
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर कहा कि गौसंरक्षण केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विभागों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि इसी प्रकार के संयुक्त प्रयासों से स्थायी समाधान संभव है।
एक सप्ताह में भूसा खरीदने के निर्देश
प्रशासन ने आगे की योजना भी स्पष्ट कर दी है। जिलाधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिए कि वे ग्राम प्रधानों के साथ समन्वय बनाकर एक सप्ताह के भीतर अधिक से अधिक भूसा खरीद सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में किसी भी गौशाला में चारे की कमी न हो।
इन गौशालाओं को भेजा गया भूसा
दान किया गया भूसा जनपद की प्रमुख गौशालाओं में वितरित किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:नेरा चौरा चांदपुर बेहरिन सौसरी यह वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि जरूरतमंद स्थानों तकसंसाधन समय पर पहुंचें।
अधिकारी भी रहे मौजूद
इस कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें अपर जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी नरेंद्र देव द्विवेदी, उप निदेशक कृषि संतोष कुमार, जिला कृषि अधिकारी संत लाल गुप्ता एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सरदुल सिंह प्रमुख रहे।
सामूहिक प्रयास से समाधान की ओर कदम
कन्नौज प्रशासन की यह पहल न केवल गौशालाओं में चारे की तत्काल जरूरत को पूरा करती है, बल्कि भविष्य के लिए एक संगठित मॉडल भी प्रस्तुत करती है। यदि इसी तरह विभागीय समन्वय और सामाजिक भागीदारी बनी रहती है, तो गौसंरक्षण के क्षेत्र में स्थायी सुधार संभव है।






