
उत्तर प्रदेश में निजी शीतगृहों में आलू भंडारित करने वाले किसानों को अनुदान का लाभ दिलाने के लिए आवेदन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में शासन से अपील की गई है कि 31 अक्टूबर 2026 की निर्धारित अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 किया जाए। मांग पत्र में एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान आईडी बनने में देरी, आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता और अनुदान राशि के भुगतान में विलंब जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए इनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
एग्रीस्टेक पोर्टल की सुस्ती से बढ़ी परेशानी, छोटे किसानों पर पड़ सकता है असर
मांग पत्र के अनुसार, एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान आईडी बनने में देरी, सर्वर की धीमी गति और ऑनलाइन आवेदन की तकनीकी दिक्कतों के कारण कई पात्र किसान निर्धारित समय में आवेदन नहीं कर पाए हैं। ऐसे में आवेदन की अंतिम तिथि नहीं बढ़ने पर किसानों को योजना के लाभ से वंचित होने की आशंका है। मांग उठाई गई है कि किसानों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय दिया जाए, जिससे वे बिना जल्दबाजी के अपने दस्तावेज तैयार कर आवेदन कर सकें।
कोल्ड स्टोरेज संचालकों की तय हो जिम्मेदारी, किसानों को दस्तावेज जुटाने में मिलेगी राहत
मांग पत्र में शीतगृह संचालकों को भी योजना की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका देने की बात कही गई है। इसके तहत संबंधित कोल्ड स्टोरेज मालिकों को अपने यहां आलू भंडारित करने वाले किसानों के गेट पास, भंडारण शुल्क भुगतान की रसीद और डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) सहित जरूरी दस्तावेज पूर्ण कराने की जिम्मेदारी सौंपने का आग्रह किया गया है। साथ ही, इन अभिलेखों को किसानों को उपलब्ध कराने और ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कराने में सहयोग सुनिश्चित करने की मांग की गई है, ताकि दस्तावेजों की कमी के कारण पात्र किसानों के आवेदन अटकने की समस्या कम हो सके।
सत्यापन में तेजी और डीबीटी से भुगतान की मांग
मांग पत्र में संबंधित जिला आलू विकास अधिकारी एवं जिला उद्यान अधिकारी को आवेदनों के शीघ्र सत्यापन के लिए निर्देशित करने की मांग भी शामिल है। इसके अनुसार, आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पात्र किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से अनुदान राशि भेजी जाए। मांग करने वालों का कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता मिलने से किसानों को भंडारण खर्च का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
क्या है योजना और किसानों को कितनी मिल सकती है सहायता?
उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान निजी शीतगृहों में भंडारित आलू के भंडारण शुल्क पर अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, पात्र किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सहायता दी जाती है। एक किसान को अधिकतम 200 क्विंटल आलू पर अनुदान मिलने की सीमा के तहत अधिकतम 20 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है। इसके लिए किसान का पंजीकरण, निर्धारित दस्तावेजों की उपलब्धता और विभागीय सत्यापन आवश्यक है। आलू की निकासी से संबंधित प्रमाण भी पात्रता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है।






