
न्यायालय कर्मी अमित मिश्रा की मौत का मामला पुलिस प्रशासन के लिए गंभीर सवाल बन गया है। 27 सितंबर को कथित हमले की शिकायत के बाद समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने के परिजनों के आरोपों और न्यायालय कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने राजेपुर थाने के उपनिरीक्षक आशुतोष यादव को निलंबित कर दिया है। वहीं, राजेपुर के प्रभारी निरीक्षक राजीव पांडेय को हटाकर अमृतपुर थाने की जिम्मेदारी दी गई है। अमृतपुर के प्रभारी निरीक्षक दर्शन सिंह को राजेपुर थाने में तैनात किया गया है। इस कार्रवाई के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और कथित हमलावरों की गिरफ्तारी को लेकर निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं।
27 सितंबर को क्या हुआ था? शिकायत के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
राजेपुर थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव निवासी अमित मिश्रा जनपद न्यायाधीश कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 27 सितंबर 2026 की रात ड्यूटी से बाइक पर घर लौटते समय भरखा गांव के पास अज्ञात बाइक सवारों ने उन पर हमला किया था। आरोप है कि हमलावरों ने उनकी बाइक गिराने की कोशिश की, जिसके बाद अमित ने किसी तरह वहां से निकलकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी। परिजनों का कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अपेक्षित पुलिस सहायता नहीं मिली।
6 अक्टूबर को अमित की मौत, परिवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्टों के मुताबिक, 6 अक्टूबर की सुबह अमित मिश्रा की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हमले के बाद से अमित भयभीत थे और कार्रवाई के लिए लगातार पुलिस से संपर्क कर रहे थे। उनका यह भी आरोप है कि संबंधित दरोगा ने शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की। हालांकि, अमित की मौत और कथित हमले के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
पुलिस लाइन से कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन, कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे परिजन
अमित की मौत के बाद परिजनों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। पुलिस लाइन में विरोध के बाद परिजन और न्यायालय कर्मचारी कलेक्ट्रेट गेट के सामने धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने और कथित हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। न्यायालय कर्मचारी संघ ने भी मामले में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी दी थी। अधिकारियों की ओर से कार्रवाई का भरोसा मिलने और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कदम उठाए जाने के बाद प्रस्तावित आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
नौ दिन बाद दर्ज हुई प्राथमिकी, जांच में क्या सामने आएगा?
अमर उजाला की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर की घटना की शिकायत के आधार पर 6 अक्टूबर को अमित की मौत के बाद राजेपुर थाने में तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ जानलेवा हमले समेत दो धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया कि घटना के संबंध में पहले एनसीआर दर्ज की गई थी। अब मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, शिकायत के निस्तारण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण है।
राजेपुर और अमृतपुर थानों में नई तैनाती
मामले में प्रशासनिक बदलाव के तहत राजेपुर के प्रभारी निरीक्षक राजीव पांडेय को अमृतपुर थाने भेजा गया है, जबकि अमृतपुर के प्रभारी निरीक्षक दर्शन सिंह को राजेपुर थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उपनिरीक्षक आशुतोष यादव को निलंबित किया गया है। इन कदमों के साथ विभागीय जांच भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार क्या कार्रवाई की गई और कहीं कर्तव्य निर्वहन में चूक तो नहीं हुई।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
अमित मिश्रा की मौत के मामले में अब सबसे अहम सवाल हैं कि 27 सितंबर की घटना की शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, कथित हमलावरों की पहचान कब होगी और जांच में संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या सामने आएगी। पुलिस विभाग की कार्रवाई के बाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रशासन पर है।






