चुनावी अटकलों पर महंत ईश्वर दास का बड़ा बयान: बोले- न चुनाव लड़ना है, न ऐसी कोई इच्छा

वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच पांचाल घाट स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वर दास महाराज ने सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलों को पूरी तरह निराधार बताया है। रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त नहीं की और न ही उनकी ऐसी कोई राजनीतिक मंशा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें। महंत ईश्वर दास लंबे समय से दुर्वासा ऋषि आश्रम के माध्यम से धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।

सोशल मीडिया की चर्चाओं पर लगाया विराम, कहा- संत ‘पद’ नहीं, ‘परम पद’ के अधिकारी होते हैं

महंत ईश्वर दास ने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर उनके विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं, जबकि उनकी ओर से ऐसा कोई बयान कभी जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बिना किसी तथ्य के इस प्रकार की खबरें प्रसारित करना उचित नहीं है और इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

‘संत परंपरा का लक्ष्य सेवा, राजनीति नहीं’

प्रेस वार्ता के दौरान महंत ने कहा कि संत परंपरा विशुद्ध आध्यात्मिक परंपरा है। संत सांसारिक पद प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि समाज, धर्म और संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित रहते हैं। उन्होंने कहा, “संत ‘पद’ नहीं बल्कि ‘परम पद’ के अधिकारी होते हैं।” उनके अनुसार संत समाज का दायित्व लोगों को सही मार्ग दिखाना और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करना है, न कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बनना।

नेताओं के आश्रम आने का चुनाव से कोई संबंध नहीं

महंत ईश्वर दास ने बताया कि दुर्वासा ऋषि आश्रम में गुरुकुल, गौशाला सहित अनेक धार्मिक एवं सेवा गतिविधियों का संचालन होता है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से संत, श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि समय-समय पर दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी नेता या जनप्रतिनिधि का आश्रम आना सामान्य धार्मिक शिष्टाचार का हिस्सा है और इसे चुनावी तैयारी से जोड़ना पूरी तरह गलत है।

सनातन धर्मियों से की अपील

महंत ने कहा कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखने के बाद उन्हें अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना आवश्यक लगा। उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों से आग्रह किया कि वे किसी भी भ्रामक या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी जनप्रतिनिधि उनके लिए समान हैं और आश्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान किया जाता है, लेकिन इसका किसी राजनीतिक उद्देश्य से कोई संबंध नहीं है।

Anuj Singh
Anuj Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *