आयरन सुक्रोज चढ़ते ही बिगड़ी तीन प्रसूताओं की हालत, लोहिया महिला अस्पताल में मचा हड़कंप

फर्रुखाबाद के डॉ. राम मनोहर लोहिया महिला अस्पताल में गुरुवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब आयरन की कमी से जूझ रहीं तीन प्रसूताओं की आयरन सुक्रोज ड्रिप चढ़ाने के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई। महिलाओं को कंपकंपी, घबराहट और बेचैनी की शिकायत होने लगी, जिससे परिजन घबरा गए और वार्ड में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और वरिष्ठ चिकित्सक तत्काल वार्ड पहुंचे।

आधे घंटे बाद दिखने लगे रिएक्शन के लक्षण

जानकारी के अनुसार, प्रसव के बाद शरीर में खून की कमी पाए जाने पर तीनों महिलाओं को आयरन सुक्रोज लगाया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि ड्रिप शुरू होने के करीब आधे घंटे बाद महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी। किसी को तेज सर्दी लगने लगी तो किसी को घबराहट और असहजता महसूस हुई। स्थिति बिगड़ती देख स्टाफ नर्सों ने तत्काल दवा चढ़ाना बंद कराया और चिकित्सकों को बुलाया गया। इसके बाद सभी मरीजों की निगरानी शुरू की गई।

तीनों प्रसूताओं में गंभीर एनीमिया की पुष्टि

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, प्रभावित प्रसूताओं में सोता बहादुरपुर गांव निवासी आफरीन शामिल हैं, जिन्हें मंगलवार को भर्ती कराया गया था और बुधवार को प्रसव हुआ। जांच में उनका हीमोग्लोबिन लगभग 7 ग्राम पाया गया था। दूसरी प्रसूता कायमगंज तहसील के रायपुर गांव की रागनी हैं, जिनका बुधवार रात प्रसव हुआ था और उनका हीमोग्लोबिन करीब 8 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं कासगंज जनपद के सायपुर नगरिया गांव निवासी स्वाति के शरीर में मात्र 4.9 ग्राम हीमोग्लोबिन पाया गया था, जिसके चलते उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया था।

सीएमएस ने संभाला मोर्चा, कहा- मरीज अब सुरक्षित

घटना की जानकारी मिलते ही महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. धीर सिंह प्रसव वार्ड पहुंचीं और तीनों मरीजों की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि आयरन सुक्रोज चढ़ाने के दौरान हल्का रिएक्शन सामने आया था, जिसके बाद तुरंत दवा रोक दी गई। प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के बाद तीनों प्रसूताओं की हालत सामान्य हो गई है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सभी मरीज अब खतरे से बाहर हैं और लगातार निगरानी में रखी गई हैं।

क्या है आयरन सुक्रोज और क्यों दिया जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, आयरन सुक्रोज का उपयोग शरीर में आयरन की कमी और एनीमिया की स्थिति को सुधारने के लिए किया जाता है। गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं में हीमोग्लोबिन कम होने पर यह दवा नसों के जरिए चढ़ाई जाती है। हालांकि कई मामलों में मरीजों को एलर्जिक या दवा संबंधी रिएक्शन हो सकते हैं। इसी कारण इसे हमेशा चिकित्सकीय निगरानी में देने की सलाह दी जाती है।

अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

फर्रुखाबाद की इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की निगरानी व्यवस्था और दवाओं के उपयोग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन इसे सामान्य मेडिकल रिएक्शन बता रहा है, लेकिन परिजनों में घटना को लेकर नाराजगी और चिंता बनी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर एनीमिया से जूझ रही महिलाओं को ऐसी दवाएं देते समय अतिरिक्त सतर्कता और निरंतर मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है।

Anuj Singh
Anuj Singh

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