गंगा की बाढ़ से मिलेगी राहत 465 करोड़ की योजना से 90 गांवों की किस्मत बदलने की उम्मीद
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संवाद 24 संवाददाता। जिले में वर्षों से बाढ़ और कटान की मार झेल रहे ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी पहल सामने आई है। जिले में 465 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 49 किलोमीटर लंबा गंगा तटबंध बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्ताव को शासन से स्वीकृति मिलने की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों से सहमति भी ली जा रही है।
इस परियोजना के पूरा होने पर जिले के करीब 90 राजस्व गांवों की लगभग डेढ़ लाख आबादी को हर वर्ष आने वाली बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फर्रुखाबाद में गंगा नदी की कुल लंबाई लगभग 80 किलोमीटर है। बरसात के मौसम, विशेषकर जुलाई और अगस्त में, जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी उफान पर आ जाती है। परिणामस्वरूप तटीय गांवों में खेत जलमग्न हो जाते हैं, खड़ी फसलें नष्ट होती हैं और कई गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है।
बाढ़ के अलावा गंगा के कटान से भी किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई परिवारों की खेती योग्य भूमि वर्ष दर वर्ष नदी में समा जाती है। लंबे समय से ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों द्वारा स्थायी बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठाई जाती रही है।
सिंचाई विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार प्रस्तावित तटबंध दो प्रमुख क्षेत्रों में बनाया जाएगाहालांकि जिले में गंगा की लंबाई 80 किलोमीटर होने के कारण पूर्व बैठकों में तटबंध की लंबाई बढ़ाने का मुद्दा भी सामने आया था। फिलहाल प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल सुरक्षा देने की है।
परियोजना के लिए सरकारी भूमि के साथ-साथ कुछ स्थानों पर किसानों की निजी जमीन भी अधिग्रहीत करनी पड़ेगी। शासन के निर्देशानुसार अधिग्रहण से पहले किसानों की सहमति ली जा रही है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार के अनुसार सहमति पत्र एकत्र कर शासन को भेजे जाएंगे। स्वीकृति के बाद ही धनराशि आवंटन, टेंडर प्रक्रिया और कार्यदायी संस्था का चयन होगा, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
फर्रुखाबाद के लिए प्रस्तावित गंगा तटबंध परियोजना सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि बाढ़ से जूझते हजारों परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। शासन से मंजूरी और समयबद्ध निर्माण होने पर यह योजना जिले के तटीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बदल सकती है।
अब नजरें प्रशासनिक स्वीकृति और आगे की कार्यवाही पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि दशकों पुरानी बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में यह कदम निर्णायक साबित होगा।






