
संवाद 24 संवाददाता। जनपद में आशा कार्यकर्ताओं की 50 दिन से जारी हड़ताल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, बच्चों का टीकाकरण, रूबेला अभियान और आयुष्मान कार्ड निर्माण जैसे अहम कार्य ठप पड़े हैं। मंगलवार को भी आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन जारी रखा और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं ने 15 दिसंबर से 14 सूत्रीय मांगों को लेकर कार्यबहिष्कार शुरू किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मानदेय भुगतान, प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाओं से जुड़ी मांगें लंबित हैं। 50 दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल न होने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
हड़ताल का सीधा असर ग्रामीण और शहरी बस्तियों में दिख रहा है। नियमित टीकाकरण बाधित होने से बच्चों के स्वास्थ्य जोखिम बढ़े हैं, वहीं गर्भवती महिलाओं को समय पर परामर्श और जांच नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य विभाग के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
धरने के दौरान जिलाध्यक्ष मिथिलेश सोलंकी और सचिव सपना कटियार ने स्पष्ट किया कि जब तक लंबित भुगतान नहीं होता और सभी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं का लाखों रुपये का भुगतान बकाया है, जिससे परिवारों की आजीविका पर भी असर पड़ा है।
आंदोलन को किसान संगठनों का भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है, जिससे दबाव और बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो जनपद की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन और शासन स्तर पर संवाद के जरिए गतिरोध तोड़ने की आवश्यकता जताई जा रही है।






