
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – षष्ठी अगले दिन (17 अक्टूबर) प्रातः 05:55 AM तक, तत्पश्चात् सप्तमी
वार – शुक्रवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – ज्येष्ठा प्रातः 06:48 AM तक, तत्पश्चात् मूल
योग – शोभन रात्रि 10:05 PM तक, तत्पश्चात् अतिगण्ड
करण – कौलव अपराह्न 04:39 PM तक, तत्पश्चात् तैतिल अगले दिन (17 अक्टूबर) प्रातः 05:55 AM तक, तत्पश्चात् गर
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:11 AM
सूर्यास्त – 05:42 PM
चन्द्रोदय – 11:26 AM
चन्द्रास्त – 09:34 PM
चन्द्र राशि – वृश्चिक प्रातः 06:48 AM तक, तत्पश्चात् धनु
अभिजित मुहूर्त – 11:34 AM से 12:20 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:52 PM से 02:38 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 10:30 AM से 11:57 AM तक
यमगण्ड – 02:49 PM से 04:16 PM तक
गुलिक काल – 07:38 AM से 09:04 AM तक
दुर्मुहूर्त – 08:30 AM से 09:16 AM तक एवं 12:20 PM से 01:06 PM तक
कंटक – 01:06 PM से 01:52 PM तक
शुभ चौघड़िया
चर – 06:11 AM से 07:38 AM तक
लाभ – 07:38 AM से 09:04 AM तक
अमृत – 09:04 AM से 10:30 AM तक
शुभ – 11:57 AM से 01:23 PM तक
चर – 04:16 PM से 05:42 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पश्चिम
यात्रा उपाय – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो राई (सरसों) या जौ खाकर अथवा शीशा (दर्पण) देखकर प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
शारदीय नवरात्रि (षष्ठम दिवस – माँ कात्यायनी पूजन) एवं बिल्वनिमंत्रण
आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर माँ दुर्गा के छठे स्वरूप ‘माँ कात्यायनी’ की पूजा-अर्चना की जाती है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट होने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा गया। ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कालिंदी तट पर इन्हीं की आराधना की थी। इनकी पूजा से विवाह में आने वाली समस्त बाधाएं समाप्त होती हैं और मनोवांछित फल मिलता है। साथ ही बंगाल दुर्गा पूजा उत्सव के अंतर्गत आज सायं ‘बिल्वनिमंत्रण’ (बोधन) का अनुष्ठान भी किया जाएगा।
मूल नक्षत्र एवं गंडमूल विचार
प्रातः 06:48 तक ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा, तत्पश्चात् मूल नक्षत्र प्रारंभ होगा। दोनों ही नक्षत्र गंडमूल श्रेणी में आते हैं। मूल नक्षत्र के स्वामी केतु देव और अधिपति ‘निरृति’ हैं। अतः आज जन्मे शिशुओं की मूल शांति विधि-विधान से करानी चाहिए।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज प्रातः 06:48 पर चन्द्रमा मंगल की राशि वृश्चिक से निकलकर देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करेंगे। धनु राशि में चन्द्रमा का गोचर ज्ञान, धर्म, दर्शन और आशावादिता में वृद्धि करता है। रात्रि 10:05 तक शोभन योग रहने से यह दिन मांगलिक कार्यों, विद्यारंभ और माँ कात्यायनी की आराधना के लिए अत्यंत कल्याणकारी रहेगा।

आज का राशिफल – 16 अक्टूबर 2026 शुक्रवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
प्रातः 06:48 के बाद नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएंगे। आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता प्राप्त होगी।
उपाय – माँ कात्यायनी को शहद या लाल पुष्प अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से सेहत और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। वित्तीय मामलों में जोखिम न लें।
उपाय – छोटी कन्याओं को मिश्री या सफेद मिठाई भेंट करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी सौहार्द बढ़ाएगा। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – भगवान विष्णु के मंदिर में कपूर जलाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने कर्जों और रोगों से राहत मिलेगी।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा और प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।
उपाय – माँ दुर्गा को लाल चुनरी और अनार अर्पित करें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान केंद्रित रखेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़ा काम आगे बढ़ सकता है। माताजी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राओं के योग बन रहे हैं।
उपाय – माँ कात्यायनी के समक्ष घी का दीपक जलाएं और श्री सूक्त का पाठ करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना बनेगी। परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहेगा और वाणी से लाभ होगा।
उपाय – लक्ष्मी नारायण जी को गुलाब का फूल या इत्र अर्पित करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
प्रातः 06:48 के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व सामाजिक कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – जरूरतमंदों को सफेद अन्न या वस्त्र का दान करें।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। व्यावसायिक विस्तार के लिए दिन उत्तम है।
उपाय – भगवान शिव को अक्षत (चावल) अर्पित करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। उच्चाधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट्स मिलने के उत्तम योग हैं।
उपाय – केले के वृक्ष में जल अर्पित करें और माँ दुर्गा की आरती करें।
॥ शुभम भवतु ॥

