14 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 14 अक्टूबर 2026, बुधवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – चतुर्थी अगले दिन (15 अक्टूबर) प्रातः 01:14 AM तक, तत्पश्चात् पंचमी
वार – बुधवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – अनुराधा अगले दिन (15 अक्टूबर) प्रातः 04:03 AM तक, तत्पश्चात् ज्येष्ठा
योग – आयुष्मान रात्रि 08:38 PM तक, तत्पश्चात् सौभाग्य
करण – वणिज दोपहर 12:17 PM तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा) अगले दिन (15 अक्टूबर) प्रातः 01:14 AM तक, तत्पश्चात् बव

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:10 AM
सूर्यास्त – 05:44 PM
चन्द्रोदय – 09:31 AM
चन्द्रास्त – 07:55 PM
चन्द्र राशि – वृश्चिक
अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं
विजय मुहूर्त – 01:53 PM से 02:39 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 11:57 AM से 01:24 PM तक
यमगण्ड – 07:37 AM से 09:04 AM तक
गुलिक काल – 10:30 AM से 11:57 AM तक
दुर्मुहूर्त – 11:34 AM से 12:20 PM तक
कंटक – 04:12 PM से 04:58 PM तक

शुभ चौघड़िया
लाभ – 06:10 AM से 07:37 AM तक
अमृत – 07:37 AM से 09:04 AM तक
शुभ – 10:30 AM से 11:57 AM तक
चर – 02:50 PM से 04:17 PM तक
लाभ – 04:17 PM से 05:44 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – उत्तर
यात्रा उपाय – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो तिल या धनिया खाकर अथवा भगवान श्रीगणेश का ध्यान करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
शारदीय नवरात्रि (चतुर्थ दिवस – माँ कूष्मांडा पूजन) एवं उपांग ललिता व्रत
आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप ‘माँ कूष्मांडा’ की पूजा की जाती है। अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण इन्हें ‘कूष्मांडा’ कहा गया है। इनकी उपासना से आयु, यश, बल और आरोग्य में वृद्धि होती है। साथ ही आज के दिन संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए ‘उपांग ललिता व्रत’ (ललिता पंचमी पूर्व संध्या) भी श्रद्धापूर्वक रखा जाता है।

अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव
अनुराधा नक्षत्र अगले दिन प्रातः 04:03 तक रहेगा, जिसके स्वामी शनिदेव और अधिपति देव ‘मित्र’ (सूर्य स्वरूप) हैं। यह एक मैत्र व सौम्य नक्षत्र है, जो मित्रता, सामाजिक सौहार्द, व्यावसायिक साझेदारी, धार्मिक साधना और दीर्घकालिक योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज दिन में अभिजित मुहूर्त नहीं रहेगा। चन्द्रमा पूरे दिन-रात मंगल की राशि वृश्चिक में संचरण करेंगे। दोपहर 12:17 से रात्रि 01:14 तक भद्रा का प्रभाव रहेगा, अतः सांसारिक नवीन मांगलिक कार्यों के आरंभ से बचें। रात्रि 08:38 तक आयुष्मान योग और उसके बाद सौभाग्य योग रहने से किए गए आध्यात्मिक अनुष्ठान विशेष शुभ फल और सौभाग्य प्रदान करेंगे।

आज का राशिफल – 14 अक्टूबर 2026 बुधवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं और बिना सोचे-समझे वित्तीय जोखिम न लें। धैर्यपूर्वक काम करें।
उपाय – माँ कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में सुख और आपसी तालमेल बढ़ाएगा। व्यापारिक साझेदारों से सहयोग मिलेगा। सामाजिक जीवन में आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – छोटी कन्याओं को फल या हरी चूड़ियां भेंट करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका वर्चस्व स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूरा फल मिलेगा। पुराने कर्जों और विवादों से राहत मिलेगी।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जप करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन और शोध में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से प्रसन्नता और रचनात्मक कार्यों में प्रगति होगी।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान केंद्रित रखेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़ा काम आगे बढ़ सकता है। माताजी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें और दुर्गा चालीसा पढ़ें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। मित्रों और भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन अत्यंत लाभकारी व्यावसायिक यात्राएं संभव हैं।
उपाय – गाय को हरी घास या पालक खिलाएं।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन वापस आने की संभावना है। परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहेगा और वाणी से लाभ होगा।
उपाय – माँ दुर्गा के मंदिर में घी का दीपक जलाएं।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में आपकी योजनाओं को सराहा जाएगा। सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – सुंदरकांड का पाठ करें या हनुमान चालीसा पढ़ें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व शुभ कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। वरिष्ठ सहयोगियों और मित्रों से पूरा समर्थन मिलेगा। व्यावसायिक विस्तार के लिए दिन उत्तम है।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि करेगा। उच्चाधिकारियों का समर्थन मिलेगा। व्यापार में नए प्रोजेक्ट्स मिलने के प्रबल योग हैं।
उपाय – पक्षियों को दाना डालें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।

॥ शुभम भवतु ॥

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