04 अक्टूबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 04 अक्टूबर 2026, रविवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – नवमी अगले दिन (05 अक्टूबर) प्रातः 03:55 AM तक, तत्पश्चात् दशमी
वार – रविवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – पुनर्वसु अगले दिन (05 अक्टूबर) प्रातः 00:14 AM तक, तत्पश्चात् पुष्य
योग – परिघ दोपहर 12:32 PM तक, तत्पश्चात् शिव
करण – तैतिल सायं 04:53 PM तक, तत्पश्चात् गर अगले दिन (05 अक्टूबर) प्रातः 03:55 AM तक, तत्पश्चात् वणिज

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:05 AM
सूर्यास्त – 05:55 PM
चन्द्रोदय – अगले दिन (05 अक्टूबर) 00:26 AM
चन्द्रास्त – 01:48 PM
चन्द्र राशि – मिथुन सायं 06:32 PM तक, तत्पश्चात् कर्क
अभिजित मुहूर्त – 11:36 AM से 12:24 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:58 PM से 02:46 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 04:26 PM से 05:55 PM तक
यमगण्ड – 12:00 PM से 01:29 PM तक
गुलिक काल – 02:57 PM से 04:26 PM तक
दुर्मुहूर्त – 04:20 PM से 05:07 PM तक
कंटक – 10:02 AM से 10:49 AM तक

शुभ चौघड़िया
उद्वेग – 06:05 AM से 07:34 AM तक
चर – 07:34 AM से 09:02 AM तक
लाभ – 09:02 AM से 10:31 AM तक
अमृत – 10:31 AM से 12:00 PM तक
शुभ – 01:29 PM से 02:57 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पश्चिम
यात्रा उपाय – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दलिया, घी या पान खाकर अथवा भगवान भास्कर (सूर्यदेव) को अर्घ्य देकर प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी / अविधवा नवमी)
आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पितृपक्ष में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसे ‘मातृ नवमी’ कहा जाता है। परिवार की दिवंगत माताओं, दादियों तथा सुहागिन (अविधवा) स्त्रियों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण व ब्राह्मण/सुहागिन भोजन आज कराया जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण मातृ ऋण से मुक्ति और कुल में सुख-शांति प्रदान करता है।

पुनर्वसु नक्षत्र एवं सूर्योपासना
पुनर्वसु नक्षत्र मध्यरात्रि 00:14 तक प्रभावी रहेगा, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति और अधिपति देवी ‘अदिति’ (देवमाता) हैं। यह नक्षत्र समृद्धि, पुनर्स्थापना, दया और आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक है। रविवार का दिन होने से सूर्यदेव की आराधना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ पितृ कृपा व आरोग्य दिलाने वाला रहेगा।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
दोपहर 12:32 के बाद प्रारंभ होने वाला ‘शिव योग’ धार्मिक अनुष्ठानों व दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ व कल्याणकारी है। सायं 06:32 पर चन्द्रमा अपनी स्वराशि कर्क में प्रवेश करेंगे, जिससे मानसिक शांति, पारिवारिक आत्मीयता और भावनात्मक स्थिरता में वृद्धि देखने को मिलेगी।

आज का राशिफल – 04 अक्टूबर 2026 रविवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दिन के पूर्वार्ध में पराक्रम और आत्मविश्वास बना रहेगा। सायं 06:32 के बाद चतुर्थ भाव में स्वराशि के चन्द्रमा पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि करेंगे और सुख-सुविधाओं पर ध्यान रहेगा।
उपाय – प्रातः काल सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
शाम तक आर्थिक मामलों में सफलता और वाणी से लाभ मिलेगा। शाम के बाद तृतीय भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा और साहस में वृद्धि होगी।
उपाय – गायत्री मंत्र का पाठ करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
शाम तक चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, जिससे मानसिक स्पष्टता बनी रहेगी। शाम के बाद धन भाव में चन्द्रमा के आने से फंसा हुआ धन मिलने के योग बनेंगे।
उपाय – गाय को रोटी पर गुड़ रखकर खिलाएं।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
दिन में थोड़ा संयम रखें और अनावश्यक भागदौड़ से बचें। सायं 06:32 के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और मन प्रसन्न रहेगा।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए साधन निर्मित करेंगे। मित्रों से सहयोग मिलेगा। शाम के बाद द्वादश भाव में चन्द्रमा होने से खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण आवश्यक होगा।
उपाय – सूर्यदेव को प्रणाम करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ाएंगे। शाम के बाद एकादश भाव में चन्द्रमा के आने से व्यावसायिक लाभ में वृद्धि होगी और महत्वपूर्ण संपर्क बनेंगे।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
भाग्य का साथ मिलेगा और धार्मिक कार्यों में रुचि रहेगी। शाम के बाद दशम भाव में स्वराशि के चन्द्रमा आने से वरिष्ठ अधिकारियों का समर्थन मिलेगा और पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – किसी जरूरतमंद को फल या अन्न का दान करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
दिन के पूर्वार्ध में स्वास्थ्य और खानपान का ध्यान रखें। शाम के बाद नवम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा और रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
दाम्पत्य जीवन में सुख और व्यापारिक साझेदारियों से लाभ होगा। शाम के बाद अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से वाहन सावधानी से चलाएं और विवादों से दूर रहें।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों पर आपकी विजय सुनिश्चित करेगा। शाम के बाद सप्तम भाव में चन्द्रमा के आने से दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी और साझेदारी से लाभ होगा।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
बौद्धिक कार्यों और अध्ययन में सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से प्रसन्नता होगी। शाम के बाद षष्ठ भाव में चन्द्रमा होने से नौकरी में आपकी मेहनत की सराहना होगी।
उपाय – भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और लाल पुष्प अर्पित करें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
पारिवारिक मामलों में संतुलन बनाकर चलें। शाम के बाद पंचम भाव में स्वराशि के चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता, रचनात्मक कार्यों और निर्णय शक्ति में उत्कृष्ट परिणाम दिलाएंगे।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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