
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी में जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा और हंगामे को लेकर सर्वोच्च अदालत ने कड़ा और पारदर्शी रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति ने इस मामले में आम नागरिकों, प्रदर्शनकारियों और पीड़ितों से सीधे साक्ष्य व आपत्तियां जुटाने के लिए एक विशेष डिजिटल शिकायत पोर्टल की शुरुआत की है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिना किसी प्रशासनिक दबाव या पूर्वाग्रह के घटना से जुड़े तथ्यों, वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजी सबूतों को निष्पक्षता से संकलित करना है।
न्यायिक समिति की सीधी निगरानी में तैयार हुआ मंच
जंतर-मंतर पर घटित घटनाक्रम को लेकर अदालत में दायर याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया था। इस समिति को यह दायित्व सौंपा गया था कि वह मौके पर मौजूद गवाहों, प्रभावित पक्षों और सुरक्षा एजेंसियों के बयानों का सूक्ष्म विश्लेषण करे। अक्सर ऐसे संवेदनशील मामलों में आम नागरिकों को पुलिस थानों या दफ्तरों में जाकर बयान दर्ज कराने में असहजता महसूस होती है। इसी समस्या के समाधान हेतु समिति ने यह ऑनलाइन पोर्टल पेश किया है। अब पीड़ित पक्ष या प्रत्यक्षदर्शी घर बैठे अपने साक्ष्य और शिकायतें सीधे जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे।
साक्ष्य अपलोड करने की मिलेगी पूरी सुविधा
शुरू किए गए इस पोर्टल में उपयोगकर्ताओं के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुविधाएं जोड़ी गई हैं:
मल्टीमीडिया साक्ष्य: शिकायतकर्ता घटना से जुड़े मोबाइल वीडियो, सीसीटीवी क्लिप्स, फोटो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सीधे अपलोड कर सकते हैं।
गोपनीयता का पुख्ता प्रबंध: समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई गवाह अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता है, तो पोर्टल पर पहचान गोपनीय रखने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।
ट्रैकिंग सिस्टम: शिकायत दर्ज होने के बाद प्रत्येक आवेदक को एक यूनीक ट्रैकिंग नंबर मिलेगा, जिसके जरिए वे अपनी शिकायत की स्थिति देख सकेंगे।
समिति ने अपील की है कि जंतर-मंतर पर मौजूद पत्रकार, स्थानीय दुकानदार, राहगीर या प्रदर्शन में शामिल ऐसे लोग जिनके पास हिंसा की शुरुआत अथवा सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं, वे बिना किसी झिझक के पोर्टल पर जानकारी साझा करें।
जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम
राजधानी के प्रमुख धरना स्थल जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध के दौरान टकराव और उपद्रव की घटनाएं लगातार कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती रही हैं। एक ओर जहां प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और मनमानी कार्रवाई के आरोप लगाए थे, वहीं सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा शांति भंग करने और पथराव की दलील दी थी। सुप्रीम कोर्ट की समिति द्वारा उठाया गया यह डिजिटल कदम दोनों पक्षों के दावों की सत्यता परखने में मील का पत्थर साबित होगा। प्राप्त शिकायतों और डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिसके आधार पर तैयार की जाने वाली अंतिम रिपोर्ट सीधे शीर्ष अदालत की पीठ को सौंपी जाएगी।






