तूफानी तट पर सियासी महासंग्राम! दक्षिण 24 परगना में खिलेगा ‘कमल’ या ‘जुड़वा फूल’?
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संवाद 24 पश्चिम बंगाल। विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण से पहले दक्षिण 24 परगना का तटीय इलाका सियासी तौर पर बेहद गरम हो चुका है। यहां मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व और जनविश्वास की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। एक ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने मजबूत गढ़ को बचाने में जुटी है, तो दूसरी ओर भाजपा (BJP) ‘कमल खिलाने’ के मिशन के साथ पूरी ताकत झोंक रही है। दक्षिण 24 परगना लंबे समय से TMC का मजबूत किला माना जाता रहा है। यहां की कई विधानसभा सीटों पर पार्टी का प्रभाव गहरा है, खासकर डायमंड हार्बर, जयनगर और जादवपुर जैसे क्षेत्रों में। लेकिन इस बार चुनावी समीकरण पहले जैसे सरल नहीं हैं। भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत की है और अब वह इस इलाके में सीधी चुनौती पेश कर रही है।
क्यों अहम है दक्षिण 24 परगना?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना की सीटें राज्य की सत्ता तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। यहां की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति इसे और भी खास बनाती है। समुद्री तट, ग्रामीण इलाकों और शहरी विस्तार का मिश्रण होने के कारण यहां मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी विविध हैं। इस जिले में बड़ी संख्या में किसान, मछुआरे और निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं, जिनके लिए रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा जैसे मुद्दे सबसे अहम हैं। इसके साथ ही यहां धार्मिक और सामाजिक समीकरण भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
चुनावी माहौल: रैलियां, आरोप-प्रत्यारोप और रणनीति
चुनाव से पहले पूरे राज्य में जोरदार प्रचार अभियान चल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई रोड शो और जनसभाओं के जरिए जनता से सीधा संवाद किया, जबकि भाजपा ने भी बड़े नेताओं के जरिए माहौल बनाने की कोशिश की। भाजपा का दावा है कि इस बार राज्य में ‘परिवर्तन’ की लहर है और जनता TMC से नाराज है। वहीं TMC का कहना है कि उसकी जनकल्याण योजनाओं और जमीनी पकड़ के कारण वह फिर से सत्ता में लौटेगी। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कहीं वोटर लिस्ट को लेकर विवाद है तो कहीं हिंसा और डराने-धमकाने के आरोप सामने आए हैं।
मतदाताओं का मूड क्या कहता है?
दक्षिण 24 परगना में मतदाताओं के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग TMC की योजनाओं और स्थानीय नेतृत्व से संतुष्ट हैं, जबकि कई मतदाता बदलाव की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। भाजपा जहां राष्ट्रवाद और विकास के मुद्दों को आगे रख रही है, वहीं TMC स्थानीय पहचान, सामाजिक योजनाओं और क्षेत्रीय जुड़ाव पर जोर दे रही है।
रिकॉर्ड मतदान और बढ़ती दिलचस्पी
इस बार के चुनाव में भारी मतदान ने भी इस क्षेत्र की अहमियत को और बढ़ा दिया है। शुरुआती चरणों में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई, जिसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा मतदान अक्सर बदलाव की संभावना को बढ़ाता है, लेकिन यह किसके पक्ष में जाएगा, यह कहना अभी मुश्किल है।
कौन मारेगा बाजी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या TMC अपने गढ़ को बचा पाएगी या भाजपा यहां सेंध लगाने में सफल होगी? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, परिणाम कई कारकों पर निर्भर करेगा—स्थानीय उम्मीदवारों की छवि, बूथ स्तर की रणनीति, और आखिरी समय में मतदाताओं का झुकाव। हालांकि एक बात साफ है दक्षिण 24 परगना इस बार सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की सत्ता का ‘किंगमेकर’ बन चुका है।






