
संवाद 24 मध्य प्रदेश। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रही। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार अपने घोषणा पत्र में किए गए वादे के अनुसार योजना की मासिक सहायता राशि को वर्ष 2028 तक बढ़ाकर 3000 रुपये करेगी। उनके इस बयान के बाद सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
राशि बढ़ाने का रोडमैप
सरकार द्वारा शुरू की गई लाड़ली बहना योजना के तहत शुरुआत में महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे। बाद में इसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया और फिर 1500 रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से यह राशि 3000 रुपये तक ले जाई जाएगी, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूती मिल सके।
विपक्ष के सवाल और विरोध
विधानसभा में विपक्षी दलों ने इस घोषणा पर सवाल उठाए। कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि न केवल सहायता राशि तुरंत बढ़ाई जाए, बल्कि नए पंजीकरण भी शुरू किए जाएं ताकि पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिल सके। उनका कहना था कि कई महिलाएं अभी भी इस योजना से वंचित हैं। बहस के दौरान कुछ विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट भी कर गए।
सरकार का जवाब
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योजना पूरी पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही है। उन्होंने दोहराया कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बजट में योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
महिलाओं के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहायता राशि 3000 रुपये प्रतिमाह तक पहुंचती है, तो इससे लाखों महिलाओं की घरेलू आय में सीधा लाभ होगा। ग्रामीण और निम्न आय वर्ग की महिलाओं के लिए यह राशि घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जरूरतों में सहायक साबित हो सकती है।
नए पंजीकरण पर स्थिति स्पष्ट नहीं
हालांकि राशि बढ़ाने की घोषणा ने उत्साह पैदा किया है, लेकिन नए पंजीकरण को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। कई महिलाएं योजना में शामिल होने की प्रतीक्षा कर रही हैं। विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लाड़ली बहना योजना आगामी वर्षों में राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है। यह योजना महिलाओं के बीच सरकार की छवि मजबूत करने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यदि वादा किए अनुसार राशि 3000 रुपये तक पहुंचती है, तो यह राज्य की सबसे बड़ी सामाजिक योजनाओं में से एक बन सकती है।
आगे की राह
सरकार ने संकेत दिया है कि आर्थिक स्थिति और बजटीय प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध वृद्धि की जाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि 2028 तक 3000 रुपये प्रतिमाह देने का लक्ष्य किस प्रकार और किस समयसीमा में पूरा किया जाता है।






