तिरुपति प्रसादम में अब परिंदा भी नहीं मार पाएगा ‘मिलावट’ का पर, फ्रांस से आ रही ‘इलेक्ट्रॉनिक नाक’ पकड़ेगी घी की शुद्धता!

Share your love

संवाद 24 आंध्र प्रदेश। विश्व प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पवित्र ‘लड्डू प्रसादम’ की शुद्धता को लेकर उपजे विवादों के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो देश के धार्मिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र तिरुपति मंदिर के प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब इंसानी इंद्रियों के बजाय अत्याधुनिक तकनीक का पहरा होगा। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार तिरुमला में 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक ऐसी ‘अल्ट्रा-मॉडर्न’ फूड लैब स्थापित कर रही है, जो दुनिया की बेहतरीन प्रयोगशालाओं को टक्कर देगी।

फ्रांस की ‘ई-नोज’ और ‘ई-टंग’ तकनीक का होगा इस्तेमाल
इस नई प्रयोगशाला की सबसे बड़ी खासियत फ्रांस से आयात की जा रही ‘इलेक्ट्रॉनिक नोज’ (E-Nose) और ‘इलेक्ट्रॉनिक टंग’ (E-Tongue) मशीनें हैं। करीब 3.5 करोड़ रुपये की कीमत वाली ये मशीनें घी और अन्य खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता में होने वाले उस सूक्ष्म बदलाव को भी पकड़ लेंगी, जिसे इंसान कभी महसूस नहीं कर सकता। ‘ई-नोज’ सुगंध के आधार पर घी में किसी भी तरह की मिलावट या ऑक्सीकरण का पता लगाएगी, जबकि ‘ई-टंग’ स्वाद के रासायनिक विश्लेषण के जरिए शुद्धता की पुष्टि करेगी।

25 करोड़ का बजट और 60 कच्चे पदार्थों पर पैनी नजर
संवाद 24 को मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव ने पुष्टि की है कि इस प्रोजेक्ट के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 23 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। यह लैब 12,000 वर्ग फुट में फैली एक दो-मंजिला इमारत में आकार ले रही है।
प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले लगभग 60 कच्चे पदार्थों, जिनमें घी, काजू, किशमिश, बादाम, चना, चीनी, इलायची, हल्दी और मिर्च पाउडर शामिल हैं, को अब इस लैब की सख्त जांच से गुजरना होगा। यहाँ 50 से अधिक अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं जो माइक्रोबायोलॉजी और सेंसरी एनालिसिस के जरिए 200 प्रकार के कीटनाशकों, भारी धातुओं और एंटीबायोटिक के अंशों की जांच करेंगे।

विवादों के साये से बाहर निकलने की कवायद
इस सख्त कदम के पीछे 2024 में सामने आया वह ‘लड्डू विवाद’ है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आरोप लगे थे कि पिछली सरकार के दौरान प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में पशुओं की चर्बी और मछली के तेल की मिलावट की गई थी। एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच करीब 250 करोड़ रुपये मूल्य का मिलावटी घी इस्तेमाल होने का अनुमान है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच के बीच, मौजूदा सरकार अब तकनीक के जरिए भक्तों का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश कर रही है।

मई तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी लैब
प्रयोगशाला का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अगले महीने यानी मार्च 2026 से इसका शुरुआती संचालन शुरू होने की उम्मीद है, जबकि फ्रांस से आने वाले उपकरणों की स्थापना मई तक पूरी कर ली जाएगी। स्वास्थ्य विभाग और टीटीडी के लगभग 40 विशेषज्ञों की टीम इस लैब का संचालन करेगी। अब तिरुपति आने वाले करोड़ों भक्तों को इस बात का सुकून होगा कि उनके आराध्य का प्रसाद न केवल आस्था से भरपूर है, बल्कि विज्ञान की कसौटी पर भी सौ फीसदी खरा और सुरक्षित है। यह पहल भारत के अन्य बड़े मंदिरों के लिए भी एक मानक (Benchmark) स्थापित करेगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News