
संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के आसमान में युद्ध के काले बादल गहराने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस चरम बिंदु पर पहुँच चुका है, जहाँ से वापसी की राहें धुंधली पड़ती जा रही हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार, 23 फरवरी 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है। भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने सभी नागरिकों को तत्काल प्रभाव से देश छोड़ने की सख्त हिदायत दी है।
ट्रंप की 10 दिनों की चेतावनी: ‘डील करो या अंजाम भुगतो’
इस संकट की जड़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में ईरान को 10 से 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप का कहना है कि या तो ईरान उनकी शर्तों पर परमाणु समझौते (Nuclear Deal) के लिए तैयार हो जाए, वरना उसे “ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति” का सामना करना पड़ेगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी। वाशिंगटन ने इस चेतावनी को पुख्ता करने के लिए पहले ही क्षेत्र में अपने दो विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers), घातक लड़ाकू विमान और भारी सैन्य साजो-सामान तैनात कर दिए हैं।
भारतीय दूतावास का ‘इमरजेंसी एग्जिट’ प्लान
भारतीय दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, “ईरान में मौजूदा बदलती सुरक्षा स्थितियों और बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए सभी भारतीय नागरिक—चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, व्यापारी हों या पर्यटक—उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों या परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग कर जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें।” दूतावास ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने पासपोर्ट और पहचान पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज हर समय अपने साथ तैयार रखें। यह एडवाइजरी जनवरी 2026 में जारी की गई पिछली चेतावनियों का ही अगला हिस्सा है। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि ईरान के भीतर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और संभावित विदेशी हमलों के बीच भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। दूतावास ने चार आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (+989128109115, +989128109109, +989128109102, +989932179359) भी जारी किए हैं ताकि किसी भी मुसीबत में भारतीय नागरिक संपर्क कर सकें।
ईरान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति और बाहरी खतरा
ईरान केवल बाहरी खतरे से ही नहीं, बल्कि आंतरिक विद्रोह से भी जूझ रहा है। तेहरान की सड़कों पर छात्रों और आम जनता का भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। शासन द्वारा किए गए दमनकारी कदमों के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप का अल्टीमेटम खत्म होने से पहले जेनेवा में होने वाली वार्ता सफल नहीं हुई, तो अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों या परमाणु केंद्रों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है।
जेनेवा वार्ता: आखिरी उम्मीद
दुनिया भर की नजरें अब आगामी गुरुवार को जेनेवा में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हैं। ओमान की मध्यस्थता में होने वाली इस बातचीत को युद्ध टालने का आखिरी मौका माना जा रहा है। हालांकि, ईरान के कट्टरपंथी रुख और ट्रंप की आक्रामक नीति के बीच समझौते की गुंजाइश कम ही नजर आ रही है।






