
संवाद 24 आंध्र प्रदेश। भारतीय नौसेना के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम तट पर आयोजित ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ (IFR) 2026 के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, जो सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर भी हैं, भारतीय नौसेना सहित दुनिया के कई मित्र देशों की समुद्री शक्ति का निरीक्षण कर रही हैं। यह भव्य आयोजन न केवल भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘सागर’ (SAGAR) विजन के तहत शांति और सुरक्षा का संदेश भी है।
71 युद्धपोतों का विशाल बेड़ा और आसमानी गर्जना
विशाखापत्तनम के तट पर आज 71 से अधिक युद्धपोत लंगर डाले खड़े हैं, जो भारत की समुद्री सीमा की रक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहते हैं। इस बेड़े में भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) से लेकर अत्याधुनिक डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और पनडुब्बियां शामिल हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ‘आईएनएस सुमेधा’ (INS Sumedha) पर सवार होकर इस विशाल बेड़े का निरीक्षण कर रही हैं। समुद्र की लहरों पर एक तरफ जहां जहाजों की कतारें अनुशासन की मिसाल पेश कर रही हैं, वहीं आसमान में 50 से अधिक लड़ाकू विमान और नौसैनिक हेलीकॉप्टर अपनी हैरतअंगेज कलाबाजियों से राष्ट्रपति को सलामी दे रहे हैं।
दुनिया ने माना भारत का लोहा: 19 देशों के युद्धपोत शामिल
इस फ्लीट रिव्यू की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल भारतीय जहाज ही नहीं, बल्कि अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे 19 मित्र देशों के शक्तिशाली युद्धपोत भी हिस्सा ले रहे हैं। पहली बार जर्मनी, फिलीपींस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सैन्य साजो-सामान भारत के किसी बड़े युद्धाभ्यास में शामिल हुए हैं। यह आयोजन ‘मिलन 2026’ (MILAN 2026) का हिस्सा है, जिसमें 65 से अधिक देशों की नौसेनाएं भाग ले रही हैं, जिससे विशाखापत्तनम आज एक मिनी-ग्लोबल विलेज बन गया है।
स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन: आईएनएस विक्रांत बना आकर्षण का केंद्र
भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक ‘आईएनएस विक्रांत’ इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण है। पूरी तरह भारत में निर्मित इस विमानवाहक पोत को देखकर विदेशी डेलीगेट्स भी चकित हैं। इसके अलावा विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर्स और नीलगिरी क्लास के स्टील्थ फ्रिगेट्स यह बताते हैं कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि अत्याधुनिक युद्धपोत बनाने वाला देश बन चुका है।
राष्ट्रपति का संबोधन और समुद्री कूटनीति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इस अवसर पर नौसेना के वीर जवानों को संबोधित करेंगी। उनका यह दौरा भारतीय नौसेना के मनोबल को बढ़ाने वाला है। नौसेना प्रमुख के अनुसार, यह फ्लीट रिव्यू केवल एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’ (Preferred Security Partner) वाली भूमिका को मजबूत करता है। आने वाले दिनों में विशाखापत्तनम की सड़कों पर ‘इंटरनेशनल सिटी परेड’ का भी आयोजन होगा, जहां विभिन्न देशों के नौसैनिक मार्च पास्ट करेंगे।
यह महाकुंभ भारत की उस रणनीतिक शक्ति को दर्शाता है, जो सुरक्षित और खुले समुद्री व्यापार मार्ग के लिए प्रतिबद्ध है। आज पूरा देश गर्व के साथ कह सकता है कि हमारी समुद्री सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं और भारतीय नौसेना समंदर की नई ‘बादशाह’ बनकर उभर रही है।






