
संवाद 24 नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर हुए भीषण हमले को लेकर पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी। अब जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि हमले में शामिल दो संदिग्धों में से एक भारतीय नागरिक था, जो मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद का निवासी बताया जा रहा है। तेलंगाना पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में मारे गए संदिग्ध की पहचान अकरम के रूप में हुई है। वह करीब तीन दशक से ऑस्ट्रेलिया में रह रहा था, लेकिन उसने भारतीय नागरिकता बरकरार रखी थी। यह जानकारी उस समय सामने आई, जब ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने हमलावर पिता-पुत्र की पृष्ठभूमि की गहन जांच शुरू की।
लाइसेंसी हथियारों से की गई गोलीबारी
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी के पास वर्ष 2015 से वैध गन लाइसेंस था। वह एक गन क्लब का सक्रिय सदस्य था और उसके पास कुल छह पंजीकृत हथियार थे। हमले के दौरान इन्हीं लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसने ऑस्ट्रेलिया में गन कंट्रोल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में गन कानून और सख्त होंगे
हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि उनकी कैबिनेट ने हथियार कानूनों को और कड़ा करने पर सहमति जताई है। सरकार एक नेशनल फायरआर्म्स रजिस्टर पर भी काम कर रही है, जिससे यह तय किया जा सके कि किसी लाइसेंसधारी को कितने हथियार रखने की अनुमति होगी और उनकी वैधता की अवधि क्या होगी।
भारत ने जताई संवेदना, दिया समर्थन
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग से बातचीत कर इस आतंकी घटना पर गहरा दुख जताया और ऑस्ट्रेलिया के प्रति भारत का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई।
संदिग्ध गतिविधियों की कड़ी जांच
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी पिता-पुत्र नवंबर में फिलीपींस की यात्रा पर गए थे। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस यात्रा का मकसद क्या था। घटना से पहले दोनों ने परिवार को साउथ कोस्ट पर मछली पकड़ने जाने की बात कही थी, लेकिन वास्तव में उन्होंने कैम्पसी इलाके में एक कमरा किराए पर लिया था। इसी कमरे से पुलिस ने दो राइफलें भी बरामद की हैं।
फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई पुलिस इस पूरे नेटवर्क और संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच में जुटी है। बोंडी बीच हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वैध हथियार किस तरह बड़े खतरे में बदल सकते हैं।






